SIR के विरोध में आज छात्रों का लोकभवन मार्च, AISA-RYA के नेतृत्व में गांधी मैदान पर जुटेंगे छात्र
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में छात्र संगठनों ने आज लोकभवन मार्च निकालने का ऐलान किया है। AISA और RYA के नेतृत्व में छात्र गांधी मैदान में जुटेंगे और वहां से लोकभवन की ओर मार्च करेंगे। प्रदर्शन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी।
छात्र संगठनों का कहना है कि SIR की प्रक्रिया को लेकर उनकी कई आपत्तियां हैं। इसी के विरोध में वे सड़क पर उतरकर अपनी मांगें सरकार और निर्वाचन व्यवस्था तक पहुंचाना चाहते हैं। मार्च के जरिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के साथ ही चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग भी उठाए जाने की संभावना है।
गांधी मैदान से शुरू होगा प्रदर्शन
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए छात्रों को गांधी मैदान में जुटने का आह्वान किया गया है। AISA-RYA के नेतृत्व में आयोजित इस मार्च में विभिन्न छात्र संगठनों और युवाओं की भागीदारी की संभावना है। इसके बाद प्रदर्शनकारी लोकभवन की ओर बढ़ेंगे।
मार्च के दौरान नारेबाजी और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किए जाने की संभावना है। हालांकि, इसमें शामिल होने वाले छात्रों की वास्तविक संख्या और मार्च के निर्धारित मार्ग की विस्तृत जानकारी की पुष्टि होना बाकी है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। छात्र संगठन SIR की प्रक्रिया का विरोध करते हुए निर्वाचन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही की मांग उठा रहे हैं।
SIR मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और उसे अद्यतन करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। विरोध करने वाले संगठनों की आपत्तियों और निर्वाचन आयोग के पक्ष का आकलन तथ्यों तथा आधिकारिक जानकारी के आधार पर किया जाना जरूरी है।
मार्च को लेकर प्रशासन की तैयारी पर नजर
लोकभवन मार्च के दौरान यातायात और सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण रहेगी। प्रदर्शन के चलते गांधी मैदान और आसपास के इलाकों में आवाजाही प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, प्रशासन की ओर से यातायात डायवर्जन, सुरक्षा व्यवस्था या मार्च की अनुमति को लेकर किसी आधिकारिक आदेश की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
फिलहाल सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि मार्च में कितने छात्र शामिल होते हैं, प्रदर्शनकारी अपनी मांगें किस तरह रखते हैं और प्रशासन की क्या प्रतिक्रिया रहती है। छात्र संगठनों का यह प्रदर्शन SIR को लेकर जारी विरोध के बीच बिहार में राजनीतिक और चुनावी मुद्दों पर बहस को और तेज कर सकता है।