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बिहार में इंटरमीडिएट परीक्षा के पहले दिन छात्रों को समय की कड़ाई ने किया प्रभावित

 

बिहार में 2 फरवरी से इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा शुरू हो गई, लेकिन पहले दिन कई छात्रों को देर से पहुंचने के कारण प्रवेश नहीं मिल सका। बेगूसराय और सारण जिले के कई परीक्षा केंद्रों पर यह दृश्य देखने को मिला कि छात्र गेट पीटते रहे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें प्रवेश देने से इंकार कर दिया।

परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि छात्रों के जूते-मोजे उतरवाए गए और सभी को सख्त जांच से गुजरना पड़ा। इसके पीछे उद्देश्य परीक्षा के अनुशासन और निष्पक्षता को बनाए रखना था। अधिकारी कहते हैं कि प्रवेश समय के बाद किसी भी छात्र को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई, ताकि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित रहे।

सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ कई आदर्श केंद्रों पर छात्रों का फूल और चंदन से स्वागत भी किया गया। इसका उद्देश्य छात्रों का मनोबल बढ़ाना और उन्हें तनावमुक्त वातावरण में परीक्षा देने का अनुभव प्रदान करना था। अधिकारियों ने बताया कि इन केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई, ताकि किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या नकल की संभावना को रोका जा सके।

बेगूसराय और सारण के छात्रों ने कहा कि समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुँचने के बावजूद कई जगहों पर प्रवेश प्रक्रिया में देरी हुई। वहीं, जिन्होंने देर से आने के कारण प्रवेश नहीं पाया, उन्हें पूरे वर्ष की परीक्षा से वंचित रहना पड़ा। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि यह अनुभव बहुत तनावपूर्ण था और प्रशासन को आपात परिस्थितियों के लिए कुछ लचीले नियम लागू करने चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा में अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन छात्रों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन प्रवेश का प्रावधान होना चाहिए। इससे ऐसे छात्र जो अनजाने में देरी से पहुँचते हैं, परीक्षा से वंचित नहीं होंगे।

शिक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष परीक्षा के लिए सभी केंद्रों पर सख्त दिशा-निर्देश और सुरक्षा उपाय लागू किए गए थे। सभी केंद्रों में प्रवेश प्रक्रिया को नियंत्रित किया गया, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया। इसके अलावा, केंद्रों पर प्रशिक्षित शिक्षक और कर्मचारी तैनात किए गए, ताकि परीक्षा का संचालन सुचारु रूप से हो सके।

कुछ छात्रों ने आदर्श केंद्रों पर फूल और चंदन से स्वागत की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह छोटी पहल उन्हें मानसिक रूप से तैयार करती है और परीक्षा का अनुभव सकारात्मक बनाती है। वहीं, सुरक्षा के कड़े उपाय और देर से आने पर प्रवेश न मिलने की घटना ने यह दिखाया कि प्रशासन और छात्रों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है।

बिहार में इंटरमीडिएट परीक्षा अब अगले 12 दिनों तक जारी रहेगी। शिक्षा विभाग ने कहा है कि छात्रों को समय पर पहुँचने के लिए मार्गदर्शन और जागरूकता अभियान जारी रहेगा। अधिकारियों ने यह भी अपील की है कि छात्र और अभिभावक सभी निर्देशों का पालन करें, ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हो सके।

इस तरह, पहले दिन की घटनाओं ने यह स्पष्ट किया कि परीक्षा का अनुशासन और छात्रों की सुविधा दोनों महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन की सख्ती ने परीक्षा की अखंडता बनाए रखी, जबकि आदर्श केंद्रों की पहल ने छात्रों का मनोबल बढ़ाया।