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गयाजी में अब तक 46.70 लाख श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान, 103 बिछड़े लोगों को अपनों से मिलाया

 

बिहार के गयाजी में पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। अब तक 46.70 लाख श्रद्धालु पिंडदान कर चुके हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं की गई हैं। इस दौरान मेला क्षेत्र में बिछड़े लोगों को उनके परिजनों से मिलाने और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 103 बिछड़े हुए लोगों को उनके परिजनों से मिलाया जा चुका है। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं के तहत 1 लाख 37 हजार 966 श्रद्धालुओं का इलाज किया गया है। ये आंकड़े पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए जा रहे प्रबंधों को दर्शाते हैं।

पिंडदान के लिए देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु

गयाजी को हिंदू धर्म में पिंडदान और पितृ कर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में माना जाता है। यहां फल्गु नदी के तट और विभिन्न वेदियों पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गया में पिंडदान करने का विशेष महत्व है।

पितृपक्ष के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से लोग अपने पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के कारण घाटों और मेला क्षेत्र में लगातार गतिविधियां बनी रहती हैं।

बिछड़े लोगों को अपनों से मिलाने की व्यवस्था

भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों में कई बार लोग अपने परिवार के सदस्यों से बिछड़ जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए मेला क्षेत्र में बिछड़े लोगों की पहचान कर उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है।

अब तक 103 लोगों को उनके परिवार से मिलाया जाना इस व्यवस्था के तहत दर्ज की गई उपलब्धि है। ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं से अपील की जाती है कि वे अपने बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें तथा जरूरत पड़ने पर प्रशासन की सहायता लें।

1.37 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का इलाज

पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के आने से स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत भी बढ़ जाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1 लाख 37 हजार 966 श्रद्धालुओं का इलाज किया जा चुका है।

भीड़ के दौरान गर्मी, थकान, निर्जलीकरण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए श्रद्धालुओं को पर्याप्त पानी पीने, आराम करने और तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी जाती है।

श्रद्धालुओं की सुविधा पर प्रशासन का ध्यान

गयाजी में पिंडदान के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। बिछड़े लोगों को उनके परिजनों से मिलाना और जरूरतमंद श्रद्धालुओं को उपचार उपलब्ध कराना मेले के प्रबंधन का अहम हिस्सा है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ये आंकड़े किस तारीख और समय तक के हैं, इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसके अलावा, स्वास्थ्य शिविरों की संख्या और इलाज किए गए श्रद्धालुओं की बीमारी के अनुसार विस्तृत आंकड़े भी उपलब्ध नहीं हैं।