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बिहार में छह नई क्षेत्रीय फॉरेंसिक लैब और दो साइबर यूनिट की शुरुआत, जांच प्रक्रिया होगी तेज और सटीक

 

बिहार में कानून और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए इस साल पूर्णिया, गया, बेतिया, छपरा, मुंगेर और सहरसा में छह नई क्षेत्रीय विधि-विज्ञान प्रयोगशालाएं (FSL) शुरू की जाएंगी। अधिकारियों ने बताया कि इन प्रयोगशालाओं के लिए 163 करोड़ रुपये के आधुनिक उपकरणों का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है।

एडीजी सीआईडी पारसनाथ ने जानकारी देते हुए बताया कि इन नई फॉरेंसिक लैब से अपराधों की जांच तेज और सटीक होगी। इससे पहले अधिकांश जांच केंद्र पटना या सीमित शहरों तक ही सीमित थीं, लेकिन अब राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में फॉरेंसिक सुविधाएं उपलब्ध होने से अपराधियों का पता लगाना आसान होगा और लंबित मामलों में तेजी आएगी।

इसके साथ ही, मार्च तक पटना और राजगीर में साइबर फॉरेंसिक यूनिट भी शुरू की जाएंगी। इन यूनिट्स में मोबाइल और कंप्यूटर से संबंधित जांच राज्य के भीतर ही संभव होगी। इससे साइबर अपराध और डिजिटल सबूतों की जांच में समय की बचत होगी और जांच की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

पारसनाथ ने बताया कि नई प्रयोगशालाओं और साइबर यूनिट के शुरू होने से न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण और सीमावर्ती जिलों में भी फॉरेंसिक जांच की सुविधा मिल जाएगी। इससे अपराधियों के खिलाफ मजबूत सबूत जुटाना आसान होगा और न्याय प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बनेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में फॉरेंसिक विज्ञान और साइबर जांच में निवेश से कानून व्यवस्था को नई गति मिलेगी। डिजिटल अपराधों और गंभीर आपराधिक मामलों की जांच अब राज्य के भीतर ही संपन्न हो सकेगी, जिससे लंबित मामलों में तेजी आएगी और न्यायिक प्रणाली में सुधार होगा।

बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन का यह कदम अपराधियों के लिए सख्त संदेश है और यह साबित करता है कि तकनीक और आधुनिक विज्ञान का इस्तेमाल अपराध नियंत्रण और न्याय सुनिश्चित करने में प्राथमिकता के रूप में लिया जा रहा है।