अयोध्या तर्ज पर बनेगा सीतामढ़ी पुनौरा धाम और दरभंगा का अहिल्या स्थान, रामायण सर्किट को मिलेगी ग्लोबल पहचान
बिहार के सीतामढी स्थित मां जानकी की जन्मस्थली पुनौरा धाम को अयोध्या में राम जन्मभूमि की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के समग्र विकास के लिए कॉर्पोरेट में मेसर्स डिजाइन एसोसिएट्स को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो डिजाइन सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे।
वर्तमान में मंदिर परिसर में 17 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जबकि इसके व्यापक विकास के लिए अतिरिक्त 50 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। इस परियोजना की लागत 120 करोड़ 58 लाख रुपए अनुमानित है, जिसे नवंबर 2024 में प्रशासकीय स्वीकृति दे दी गई है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
सीताकुंड का होगा पुनर्विकास
पूर्वी चंपारण जिले में स्थित सीताकुंड के पुनर्विकास की योजना को भी मंजूरी दी गई है। इस स्थान के धार्मिक महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने इस वर्ष के लिए प्रथम किश्त के रूप में 6 करोड़ 55 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। यहां पूरे परिसर का सौंदर्यीकरण किया जाएगा, जिसमें प्रवेश द्वार, कैफेटेरिया, चारदीवारी, शौचालय ब्लॉक और दुकानों का निर्माण शामिल है। यह कार्य बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की देखरेख में अगले 18 महीने में पूरा किया जाएगा।
पंथपाकर का भी होगा विकास
सीतामढ़ी जिले के अंतर्गत आने वाले पंथपाकर स्थल को भी भव्य रूप देने की तैयारी चल रही है। इस स्थान के बारे में मान्यता है कि जब माता सीता भगवान राम के साथ अयोध्या जा रही थीं तो उनकी पालकी यहीं रुकी थी। कहा जाता है कि यहां की झील का पानी कभी नहीं सूखता। सरकार की योजना के अनुसार, मंदिर परिसर का विस्तार किया जाएगा, प्रवेश मार्ग बनाया जाएगा, कैफेटेरिया, पार्किंग, थीम आधारित प्रवेश द्वार, पेयजल, स्ट्रीट लाइटिंग, घाट का निर्माण और झील का जीर्णोद्धार किया जाएगा। पर्यटन विकास निगम इस परियोजना को भी अगले 24 माह में पूरा कर लेगा।