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सब्जी बेचकर बेटे को बनाया अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, मां की मेहनत रंग लाई; कभी ‘झंडूआ’ कहने वाले अब सम्मान से बुलाते हैं ‘झंडू जी’

 

संघर्ष और मेहनत की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां एक मां ने अपनी कड़ी मेहनत और हौसले से बेटे के सपनों को उड़ान दी। कभी सब्जी बेचकर परिवार चलाने वाली मां ने अपने बेटे को पढ़ाया-लिखाया और खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए हर संभव कोशिश की। आज उसी बेटे का चयन कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए हो गया है।

मां का कहना है कि उन्होंने कई मुश्किल हालातों का सामना करते हुए बेटे की परवरिश की। दिन-रात मेहनत कर सब्जी बेचकर जो कमाई होती थी, उसी से बेटे की पढ़ाई और खेल की जरूरतें पूरी कीं। उस समय समाज के कई लोग उनके संघर्ष को नहीं समझते थे।

उन्होंने बताया कि पहले लोग उनके बेटे को ताने मारते थे और उसे ‘झंडूआ’ कहकर बुलाते थे। लेकिन आज वही लोग सम्मान के साथ उसे ‘झंडू जी’ कहकर पुकारते हैं। बेटे की सफलता ने न सिर्फ परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि उन सभी लोगों को जवाब दिया है जो कभी उसकी काबिलियत पर सवाल उठाते थे।

मां भावुक होकर कहती हैं कि पहले लोग उन्हें सिर्फ एक सब्जी बेचने वाली महिला के रूप में देखते थे, लेकिन आज वही लोग उन्हें अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की मां के नाम से पहचानते हैं। बेटे की उपलब्धि उनके वर्षों के संघर्ष और त्याग का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि बेटे को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक परेशानियों के बावजूद कभी हिम्मत नहीं हारी। कई बार ऐसे मौके भी आए जब हालात मुश्किल थे, लेकिन उन्होंने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया।

बेटे की मेहनत और लगन ने अब परिवार की जिंदगी बदल दी है। कॉमनवेल्थ गेम्स में चयन के बाद पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लोग अब उस खिलाड़ी और उसकी मां की संघर्ष भरी कहानी को मिसाल के तौर पर देख रहे हैं।

यह कहानी उन लाखों परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करते हैं। मां की मेहनत और बेटे की मेहनत ने साबित कर दिया कि जुनून और हौसले के आगे मुश्किलें ज्यादा समय तक टिक नहीं सकतीं।