बजट 2026 पर रोहिणी आचार्य का तीखा हमला: ‘आंकड़ों की बाजीगरी, खोखला पुलिंदा’ कहा नीतीश सरकार का आर्थिक मैनेजमेंट
बिहार विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश होने के बाद, विपक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने बजट पर कटाक्ष करते हुए इसे ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ और ‘खोखला पुलिंदा’ करार दिया। उन्होंने बजट की वास्तविकताओं और नीतीश सरकार के 20 साल के आर्थिक प्रबंधन पर सवाल उठाए।
रोहिणी आचार्य ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “सरकार बजट में केवल दिखावे के लिए आंकड़े पेश कर रही है। यह बजट वास्तविक विकास और आम जनता के लाभ के मामले में बहुत कमजोर है। 20 सालों के आर्थिक प्रबंधन ने बिहार को समृद्ध नहीं बल्कि अनेक क्षेत्रों में पिछड़ा बनाया है। आज भी बिहार के किसानों, युवाओं और गरीबों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।”
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि बजट में घोषणाओं की भरमार है, लेकिन उनकी क्रियान्वयन योजना और परिणाम अस्पष्ट हैं। रोहिणी ने कहा, “नीतीश सरकार ने पिछले 20 वर्षों में जो आर्थिक नीतियाँ अपनाई हैं, उनका लाभ केवल कुछ खास वर्गों तक ही सीमित रहा है। आम जनता को अब असली बदलाव चाहिए, न कि केवल आंकड़ों का खेल।”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि रोहिणी आचार्य का यह बयान आगामी विधानसभा सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ते टकराव का संकेत है। उनका आरोप है कि बजट केवल प्रचार-प्रसार का माध्यम है और वास्तविक विकास की तस्वीर पेश नहीं करता।
विपक्ष की यह प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि बिहार में बजट पेश करने के तुरंत बाद ही राजनीति में इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। रोहिणी आचार्य ने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार, ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और किसानों के लिए योजना का असर अभी तक देखने को नहीं मिला है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बजट को केवल आंकड़ों के खेल तक सीमित न रखें, बल्कि इसके क्रियान्वयन और प्रभाव को भी सुनिश्चित किया जाए।
इस दौरान उन्होंने बिहार के शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। रोहिणी ने कहा कि “शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बजट का वास्तविक प्रभाव कम है। केवल बड़े आंकड़े दिखाकर जनता को संतुष्ट करना पर्याप्त नहीं है। जनता को विकास और कल्याण की ठोस योजनाएँ चाहिए।”
विशेषज्ञों का मानना है कि रोहिणी आचार्य के बयान से बजट पर राजनीतिक बहस और तेज होगी। विपक्ष का यह रुख यह दिखाता है कि बिहार की राजनीति में आर्थिक प्रबंधन और बजट के प्रभाव को लेकर लंबे समय तक चर्चाएँ जारी रह सकती हैं।
इस प्रकार, बजट 2026 पर रोहिणी आचार्य का तीखा हमला नीतीश सरकार के 20 साल के आर्थिक प्रबंधन को चुनौती देता है और आगामी दिनों में बिहार विधानसभा में इसके असर और बहस देखने को मिल सकती है।