RJD हिना शहाब पर विचार कर रही है, AIMIM समर्थन की रणनीति बदल सकती है
बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए राजनीतिक पारा गर्म है। राज्य की कुल 5 राज्यसभा सीटों के लिए विपक्षी दलों को एक साथ मिलकर उम्मीदवार उतारने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच हिना शहाब का नाम राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संभावित उम्मीदवार के तौर पर उभर रहा है, ताकि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का समर्थन हासिल किया जा सके। यह कदम विपक्षी खेमे के सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव ला सकता है।
हाल ही में RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने सुझाव दिया कि हिना शहाब को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया जाए। उनका मानना है कि अल्पसंख्यक चेहरे को टिकट देने से AIMIM के समर्थन की दिशा में सकारात्मक संकेत जाएगा और विपक्षी खेमे की स्थिति मजबूत होगी। हिना शहाब, दिवंगत पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हैं और उनके बेटे ओसामा शहाब भी राजनैतिक रूप से सक्रिय हैं, जो RJD विधायक भी हैं।
AIMIM के रुख में बदलाव
पिछले दिनों AIMIM ने स्पष्ट किया था कि वह राज्यसभा चुनाव में अपना ही उम्मीदवार उतारने की इच्छा रखता है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा था कि उनकी पार्टी चाहता है कि उसका प्रतिनिधि राज्यसभा में हो, जैसे लोकसभा में भारत माता पार्टी (BJP) और दूसरे दलों के सांसद होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि RJD AIMIM को समर्थन नहीं देगा, तो AIMIM भी RJD उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेगा।
हालाँकि AIMIM के नेताओं ने साफ किया है कि उनकी प्राथमिकता हिना शहाब नहीं है और वे उच्च सदन में खुद का प्रतिनिधित्व चाहते हैं। प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने यह भी संकेत दिया है कि AIMIM अपने उम्मीदवार को उतारने पर गंभीरता से विचार कर रहा है, खासकर यदि विपक्षी दल सहयोगी तौर पर समर्थन न करें।
राज्यसभा चुनाव का गणित
बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं और राज्यसभा के हर उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 41 वोटों की आवश्यकता होती है। मौजूदा समीकरण के अनुसार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास पर्याप्त संख्या है और वह आसानी से चार सीटें जीत सकता है। लेकिन पांचवीं सीट के लिए विपक्ष को वोटों की संख्या जुटाना चुनौतीपूर्ण है, जिसके लिए अतिरिक्त सहयोगी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। AIMIM के पांच विधायक और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के एक विधायक इस समीकरण को निर्णायक बना रहे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञ कहते हैं कि AIMIM इस बार न केवल अपना समर्थन देने का प्रस्ताव रख रहा है, बल्कि खुद महागठबंधन के भीतर गठबंधन समीकरण में बदलाव करने की कोशिश में है। AIMIM की मांग है कि विपक्षी दलों को पहले AIMIM के पक्ष में समर्थन देना चाहिए, इसके बाद ही अन्य उम्मीदवारों पर विचार किया जाना चाहिए। यह रणनीति राज्यसभा की 5वीं सीट पर विपक्ष को मजबूती से स्थान दिला सकती है।
सियासी हलचल जारी
राज्यसभा चुनाव के नजदीक आते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल मनोवैज्ञानिक रूप से अपने उम्मीदवारों और रणनीति को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। AIMIM के रुख ने महागठबंधन के भीतर भी चर्चा को बढ़ा दिया है कि क्या हिना शहाब जैसा उम्मीदवार विपक्षी गठबंधन में एक समानता और समर्थन का चेहरा साबित हो सकता है। हालांकि अभी तक किसी ने भी आधिकारिक रूप से उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है और सभी राजनीतिक दल रणनीति पर लगातार विचार कर रहे हैं।