बिहार में महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर का खतरा, हजारों नए मामलों का अनुमान; जांच और इलाज की व्यवस्था पर सवाल
बिहार में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ाने वाली जानकारी सामने आई है। राज्य में स्तन कैंसर (ब्रेस्ट कैंसर) और सर्वाइकल कैंसर के हजारों नए मामले सामने आने का अनुमान है। इसके बावजूद महिलाओं तक कैंसर की जांच की सुविधा सीमित पहुंच पा रही है। अस्पतालों में स्क्रीनिंग और इलाज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से समय पर बीमारी की पहचान करना चुनौती बना हुआ है।
शुरुआती जांच की कमी बड़ी चिंता
स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में शामिल हैं। इन बीमारियों की समय पर पहचान होने पर उपचार के विकल्प बेहतर हो सकते हैं। लेकिन जागरूकता की कमी, जांच सुविधाओं तक सीमित पहुंच और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी बाधाओं के कारण कई महिलाएं शुरुआती चरण में जांच नहीं करा पातीं।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए अस्पताल तक पहुंचना, जांच का खर्च उठाना और विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लेना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में बीमारी का पता देर से चलने की आशंका बढ़ जाती है।
अस्पतालों में स्क्रीनिंग और इलाज की जरूरत
कैंसर की रोकथाम और समय पर पहचान के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित स्क्रीनिंग की सुविधा जरूरी है। स्तन कैंसर की शुरुआती जांच के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा स्तनों की जांच और जरूरत के अनुसार आगे की चिकित्सकीय जांच कराई जा सकती है। वहीं, सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए निर्धारित जांच प्रक्रियाओं और जरूरत पड़ने पर आगे के परीक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।
इसके साथ ही संदिग्ध मामलों में समय पर विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंच, जांच रिपोर्ट और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना भी जरूरी है। यदि शुरुआती जांच के बाद मरीज को दूसरे शहर या बड़े अस्पताल में जाना पड़े, तो इलाज में देरी हो सकती है।
जागरूकता और समय पर जांच जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं को कैंसर के शुरुआती संकेतों के प्रति जागरूक करना और नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है। स्तन में गांठ, आकार या त्वचा में बदलाव अथवा निप्पल से असामान्य स्राव होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। असामान्य योनि रक्तस्राव या अन्य लगातार बने रहने वाले लक्षणों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर कैंसर की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए डॉक्टर की सलाह और जरूरी जांच आवश्यक होती है।
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत
बिहार में महिलाओं के लिए कैंसर स्क्रीनिंग केंद्रों की उपलब्धता बढ़ाना, स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करना और जांच के बाद उपचार तक पहुंच सुनिश्चित करना अहम है। जागरूकता अभियान के साथ ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने से अधिक महिलाओं को लाभ मिल सकता है।
फिलहाल, हजारों नए मामलों के अनुमान से जुड़ा सटीक आंकड़ा, उसका वर्ष और आधिकारिक स्रोत उपलब्ध नहीं है। इसलिए वास्तविक मामलों की संख्या और जांच सुविधाओं की स्थिति का आकलन करने के लिए स्वास्थ्य विभाग या कैंसर रजिस्ट्री के प्रमाणित आंकड़ों की जरूरत होगी।