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बिहार में बाढ़ के बीच राहत कार्य तेज, बच्चों को दूध और महिलाओं को सैनिटरी पैड बांटे जा रहे

 

बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने का काम तेज कर दिया है। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में बच्चों के लिए दूध और महिलाओं के बीच सैनिटरी पैड का वितरण शुरू कराया गया है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए सामुदायिक रसोई के जरिए भोजन की व्यवस्था भी लगातार जारी है।विभाग के मुताबिक, राज्य के 13 जिलों में 456 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बाढ़ प्रभावित लोगों को सुबह और शाम भोजन कराया जा रहा है। अब तक 10 लाख से अधिक लोगों को इन सामुदायिक रसोई केंद्रों से भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है।

35.89 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित

राज्य में बाढ़ का असर बड़े इलाके में देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 14 जिलों के 82 प्रखंडों की 491 ग्राम पंचायतों में करीब 35.89 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। कई इलाकों में घरों के आसपास पानी जमा है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित आबादी तक भोजन, पेयजल और दूसरी जरूरी वस्तुएं पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है। सामुदायिक रसोई इस दौरान लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही हैं।

बच्चों और महिलाओं की जरूरतों पर भी फोकस

बाढ़ जैसी आपदा में राहत कार्य आमतौर पर भोजन और पेयजल तक सीमित रह जाता है। इस बार आपदा प्रबंधन विभाग ने बच्चों और महिलाओं की विशेष जरूरतों को भी ध्यान में रखा है। बच्चों के लिए दूध का वितरण शुरू कराया गया है, ताकि राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में उन्हें पोषण संबंधी सहायता मिल सके।वहीं, महिलाओं के बीच सैनिटरी पैड का वितरण भी शुरू किया गया है। बाढ़ के दौरान स्वच्छता और व्यक्तिगत स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में सैनिटरी पैड की उपलब्धता महिलाओं के लिए जरूरी राहत के तौर पर देखी जा रही है।

सुबह-शाम मिल रहा भोजन

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे 456 सामुदायिक रसोई केंद्रों में लोगों को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। विभाग के अनुसार, अब तक 10 लाख से अधिक लोगों को इन केंद्रों के माध्यम से खाना खिलाया जा चुका है।प्रशासन का प्रयास है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत शिविरों या सुरक्षित स्थानों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी न हो। प्रभावित आबादी को भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ बच्चों और महिलाओं की जरूरतों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।बिहार में बाढ़ का दायरा अभी भी बड़ा है। ऐसे में आने वाले दिनों में राहत और बचाव कार्यों को लगातार जारी रखना प्रशासन के लिए चुनौती बना रहेगा। 35.89 लाख प्रभावित आबादी तक जरूरी सुविधाएं पहुंचाना फिलहाल सरकार और आपदा प्रबंधन तंत्र के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है।