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नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन पर प्रतिक्रिया: राजनीति में हलचल

 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद विपक्ष और राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रियाएँ दी हैं, जिससे राज्य की राजनीति में गर्माहट बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा दाखिल किया, जिसमें बीजेपी के वरिष्ठ नेता भी शामिल रहे। इस कदम ने चुनावी माहौल में नए राजनीतिक समीकरण पैदा कर दिए हैं।

🔹 राजद नेता मनोज कुमार झा ने कहा है कि यह निर्णय “दिल्ली से तैयार की गई स्क्रिप्ट” जैसा प्रतीत होता है और इसे भाजपा की रणनीति बताया है, न कि नीतीश कुमार के स्वेच्छा से लिया गया फैसला। उन्होंने कहा कि 20 वर्षों से सत्ता में रहने के बाद अचानक यह कदम उठाना समझ में नहीं आता।

🔹 तेजस्वी यादव ने भी इस फैसले पर तीखी आलोचना करते हुए इसे जनादेश के साथ धोखाधड़ी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने जदयू को असहाय बनाया है और “महाराष्ट्र की तरह बिहार में भी भाजपा ने नेतृत्व बदलने की योजना तैयार की है।”

🔹 राष्ट्रीय कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे राजनीतिक साजिश और गठबंधन के भीतर दबाव के तहत लिया गया निर्णय बताया और कहा कि यह जनता के विश्वास के खिलाफ है।

🔹 वहीं, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भाजपा–जदयू गठबंधन में आगामी सत्ता समीकरणों और /मुख्यमंत्री पद के संभावित बदलाव/ की तैयारी का संकेत हो सकता है।

राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस और आरोप‑प्रत्यारोप के बीच बिहार की सियासत में अब नेतृत्व परिवर्तन, गठबंधन रणनीति और आगामी राजनीतिक योजना पर बहस और तेज़ होती जा रही है।