शहाबुद्दीन के घर पहली रेड मारने वाले रत्न संजय बिहार लौटे: अशोक महतो को पकड़ने वाले अमित लोढ़ा भी फिर ग्राउंड पर, जानिए 5 सुपर कॉप की कहानी
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस महकमे में कुछ ऐसे चर्चित अधिकारियों की वापसी हुई है, जिनका नाम कभी राज्य के कुख्यात अपराधियों और गैंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई से जुड़ा रहा है। इनमें 1998 बैच के IPS अधिकारी रत्न संजय का नाम भी शामिल है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस बिहार कैडर में लौट रहे रत्न संजय ने सीवान में पुलिस अधीक्षक रहते हुए पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई की थी। उनके कार्यकाल में शहाबुद्दीन के प्रतापपुर स्थित घर पर पुलिस की कार्रवाई हुई थी और वहां से हथियार बरामद होने का मामला सामने आया था।
शहाबुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई से चर्चा में आए रत्न संजय
रत्न संजय की पहचान बिहार के उन पुलिस अधिकारियों में रही है, जिन्होंने प्रभावशाली अपराधी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की। सीवान में उनकी पोस्टिंग के दौरान शहाबुद्दीन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई ने उन्हें चर्चा में ला दिया था। उस दौर में सीवान में शहाबुद्दीन का काफी प्रभाव माना जाता था। पुलिस कार्रवाई के दौरान हथियारों की बरामदगी भी हुई थी।
अब लंबे समय बाद रत्न संजय के बिहार कैडर में लौटने की खबर ने पुलिस महकमे में चर्चा बढ़ा दी है। गृह मंत्रालय की ओर से उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से रिलीव किए जाने के बाद उनकी बिहार वापसी हुई है।
अमित लोढ़ा और अशोक महतो की कहानी
बिहार पुलिस के चर्चित अधिकारियों में अमित लोढ़ा का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। 1998 बैच के IPS अधिकारी अमित लोढ़ा ने 2006 में शेखपुरा में अशोक महतो गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की थी। अशोक महतो उस समय बिहार के चर्चित अपराधियों में शामिल था।
लोढ़ा की टीम ने तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के जरिए अशोक महतो और उसके सहयोगियों तक पहुंच बनाई। बाद में अशोक महतो की गिरफ्तारी हुई। इसी घटनाक्रम पर अमित लोढ़ा की किताब ‘बिहार डायरीज’ आधारित है और इसी कहानी से प्रेरित होकर ‘खाकी: द बिहार चैप्टर’ वेब सीरीज भी बनी।
अशोक महतो पर हत्या, नरसंहार और जेल ब्रेक समेत कई गंभीर मामलों में आरोप रहे हैं। 2006 में उसकी गिरफ्तारी बिहार पुलिस के लिए बड़ी कार्रवाई मानी गई थी।
बिहार के चर्चित पुलिस अफसरों में शामिल रहे कई नाम
बिहार में अपराध के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कई IPS अधिकारियों ने अलग-अलग जिलों में अपनी पहचान बनाई। इन अधिकारियों की पोस्टिंग अक्सर ऐसे समय में हुई, जब संबंधित इलाकों में अपराधी गिरोहों का प्रभाव काफी मजबूत था।
इनमें रत्न संजय और अमित लोढ़ा के अलावा ऐसे कई अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने गैंगवार, नक्सल गतिविधियों और संगठित अपराध के खिलाफ अभियान चलाए। इन अधिकारियों की कार्रवाइयों की वजह से बिहार पुलिस में उनकी अलग पहचान बनी।
पुराने अधिकारियों की वापसी क्यों महत्वपूर्ण
रत्न संजय की वापसी ऐसे समय हुई है, जब बिहार में चुनावी गतिविधियां तेज हैं और कानून-व्यवस्था पुलिस-प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय है। हालांकि किसी अधिकारी की तैनाती और जिम्मेदारी सरकार के प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करती है।
रत्न संजय और अमित लोढ़ा जैसे अधिकारियों की पुरानी कार्रवाइयां बिहार पुलिस के इतिहास में चर्चित रही हैं। एक ने सीवान में शहाबुद्दीन के प्रभाव वाले इलाके में कार्रवाई की, तो दूसरे ने शेखपुरा में अशोक महतो गिरोह के खिलाफ अभियान चलाया। अब इन अधिकारियों की वर्तमान जिम्मेदारियां और आने वाले समय में उनकी भूमिका प्रशासनिक आदेशों से तय होगी।
बिहार में अपराध और पुलिसिंग की पुरानी कहानियों के बीच इन चर्चित अधिकारियों की वापसी ने एक बार फिर उन पुराने ऑपरेशनों और पुलिस अभियानों को चर्चा में ला दिया है, जिनमें अपराधी गिरोहों के खिलाफ लंबी रणनीति और खुफिया तंत्र का इस्तेमाल किया गया था।