मुजफ्फरपुर के पहले मेयर की हत्या पर उठे सवाल, 8 साल बाद भी नहीं मिले सबूत; पुलिस और सरकार पर मिलीभगत के आरोप
मुजफ्फरपुर के प्रथम मेयर की हत्या के मामले को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। हत्या के करीब आठ साल बाद भी पुलिस द्वारा पर्याप्त सबूत जुटा पाने में कथित विफलता को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले में आरोप है कि पुलिस और सरकार के बीच मिलीभगत के कारण जांच को सही दिशा में आगे नहीं बढ़ाया गया और आरोपियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।
मामले को लेकर आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि इतने लंबे समय बाद भी हत्या की गुत्थी पूरी तरह नहीं सुलझ पाई है। उनका आरोप है कि पुलिस के पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त एविडेंस नहीं हैं। इसी वजह से मामले में कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं।
पुलिस और सरकार पर मिलीभगत का आरोप
मामले को लेकर पुलिस और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि दोनों के बीच मिलीभगत के चलते हत्या के मामले की जांच प्रभावी तरीके से नहीं की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
आरोप है कि मामले में पुलिस के पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के बाद जांच की दिशा और अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे। इसी क्रम में तत्कालीन एसएसपी हरप्रीत कौर के तबादले को भी इस मामले से जोड़कर देखा गया।
एसएसपी के तबादले पर भी सवाल
आरोप लगाने वाले पक्ष का दावा है कि एसएसपी हरप्रीत कौर ने मामले में सख्ती से कार्रवाई करने की कोशिश की थी। लेकिन बाद में उनका तबादला कर दिया गया। आरोप है कि इसके पीछे मकसद जांच को कमजोर करना और आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया में राहत दिलाना था।
हालांकि, एसएसपी के तबादले और हत्या के मामले के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस दावे को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।
8 साल बाद भी जांच पर सवाल
मुजफ्फरपुर के प्रथम मेयर की हत्या का मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है। इतने वर्षों के बाद भी यदि मामले में ठोस सबूत और स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आते हैं तो इससे पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मामले से जुड़े लोगों की मांग है कि हत्या की जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए और यदि पहले की जांच में कोई कमी रही है तो उसे दूर किया जाए। साथ ही आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा की जाए।
फिलहाल पुलिस और सरकार पर लगाए गए मिलीभगत के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले में आगे होने वाली जांच और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। मृतक के परिवार और समर्थकों को अब भी उम्मीद है कि हत्या की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।