NH-20 की गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल, बेना फ्लाईओवर की दरारों में पैचिंग से बढ़ी चिंता
बिहार की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की रीढ़ माने जाने वाले बख्तियारपुर–रजौली राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-20) पर एक बार फिर निर्माण कार्य और गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क के महत्वपूर्ण हिस्से बेना स्थित फ्लाईओवर में आई दरारों की मरम्मत सीमेंट और अलकतरा से पैचिंग कर किए जाने पर स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों ने नाराजगी जताई है।
यह मामला बख्तियारपुर–रजौली राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-20) से जुड़ा है, जो राज्य के यातायात और व्यापारिक आवागमन का एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इस हाईवे की गुणवत्ता को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं, और अब एक बार फिर फ्लाईओवर की मरम्मत पद्धति चर्चा में आ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लाईओवर में आई दरारों को स्थायी समाधान के बजाय अस्थायी तरीके से भर दिया गया है, जिससे इसकी मजबूती पर संदेह पैदा हो रहा है। उनका आरोप है कि इस तरह की मरम्मत लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होती और इससे भविष्य में दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी फ्लाईओवर की संरचनात्मक दरारों का इलाज वैज्ञानिक तकनीक और मानक इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं से किया जाना चाहिए, न कि केवल सतही पैचिंग से। सीमेंट और अलकतरा से की गई मरम्मत को उन्होंने केवल अस्थायी उपाय बताया है।
इस पूरे मामले ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर यदि गुणवत्ता से समझौता किया जाता है, तो यह सीधे जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ है।
हालांकि संबंधित विभाग की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामला तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने उच्च स्तरीय जांच और स्थायी मरम्मत कार्य की मांग की है।
बिहार में हाल के वर्षों में कई सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में NH-20 का यह मामला भी अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
फिलहाल लोगों की नजर प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी है, और उम्मीद की जा रही है कि फ्लाईओवर की मरम्मत को लेकर कोई ठोस और वैज्ञानिक समाधान अपनाया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को रोका जा सके।