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नगर निगम में 15 लाख से कम लागत वाली योजनाओं का विभागीय स्तर पर कार्य बंद

 

भागलपुर में नगर निगम और अन्य स्थानीय निकायों में अब विकास योजनाओं का कार्य विभागीय स्तर पर नहीं किया जाएगा। यह निर्णय नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा लिया गया है। विभाग ने पहले दिए गए आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत 15 लाख रुपये से कम लागत वाली योजनाओं को विभागीय स्तर पर संचालित किया जाता था।

विभागीय सूत्रों ने बताया कि यह कदम पारदर्शिता और उचित वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। अब ऐसे छोटे बजट वाली योजनाओं के कार्य सीधे उच्च स्तरीय अधिकारियों या निगम के विशेष प्राधिकरण के तहत ही होंगे।

नगर विकास एवं आवास विभाग के अधिकारी ने कहा, “इस परिवर्तन का उद्देश्य यह है कि सभी योजनाओं में नियंत्रण और निगरानी बेहतर तरीके से की जा सके। इससे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की संभावना कम होगी और परियोजनाओं का निष्पादन समय पर और प्रभावी ढंग से होगा।”

भागलपुर नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इससे छोटी परियोजनाओं का अनुमोदन और निगरानी अब विभागीय स्तर से हटकर अधिक केंद्रीकृत प्रणाली के तहत होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विकास कार्य गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से संपन्न हों।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कदम से न केवल सार्वजनिक धन का संरक्षण होगा, बल्कि नागरिकों को योजनाओं का उचित लाभ भी मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि विभागीय स्तर पर नियंत्रण हटने से सटीक योजना निर्माण और समीक्षा प्रणाली मजबूत होगी।

स्थानीय नागरिकों ने इस निर्णय को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोगों ने कहा कि इससे काम की प्रक्रिया धीमी हो सकती है, जबकि अन्य ने इसे पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बताया। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि नए नियम लागू करने के बाद भी स्थानीय स्तर पर समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

नगर विकास एवं आवास विभाग ने सभी स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि वे नए आदेश के अनुसार अपनी वित्तीय और प्रबंधन प्रक्रियाओं को अपडेट करें। इसके तहत 15 लाख रुपये से कम की परियोजनाओं के कार्य अब विभागीय अधिकारियों के बजाय उच्च प्रशासनिक नियंत्रण में होंगे।

इस कदम से भागलपुर नगर निगम और अन्य निकायों में विकास कार्यों की जिम्मेदारी और निगरानी का ढांचा बदल जाएगा। अधिकारी आश्वस्त हैं कि इससे नगर निगम की परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता में सुधार होगा।

नियमों के अनुसार अब नगर निगम और अन्य निकाय छोटे बजट वाली योजनाओं को लागू करने के लिए उच्च स्तरीय अनुमति और केंद्रित निगरानी प्रणाली का पालन करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी योजनाएं पारदर्शी और प्रभावी ढंग से पूरी हों, और शहरवासियों को उनके विकास कार्यों का वास्तविक लाभ मिले।