'महिला का सीना दबाना और सलवार उतारने की कोशिश रेप का प्रयास नहीं?' वीडियो में जाने पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के एक विवादित फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायाधीशों को अधिक संवेदनशीलता और कानूनी समझ के साथ फैसला देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले की विस्तार से समीक्षा कर विस्तृत आदेश जारी करेगा।
दरअसल, पटना हाईकोर्ट ने 9 जुलाई को दिए अपने फैसले में कहा था कि बंद कमरे में किसी महिला का जबरन सीना दबाना और उसकी सलवार उतारने की कोशिश करना अपने आप में दुष्कर्म (रेप) के प्रयास का अपराध सिद्ध नहीं करता। इस आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी को राहत देते हुए बरी कर दिया था। इस फैसले को लेकर कानूनी और सामाजिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई हैरानी
मामले का जिक्र सुप्रीम कोर्ट में उस समय हुआ, जब शीर्ष अदालत इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अन्य विवादित आदेश पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने पटना हाईकोर्ट के फैसले पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायाधीशों को ऐसे संवेदनशील मामलों में पूरी कानूनी पड़ताल और गंभीर अध्ययन के बाद ही निर्णय देना चाहिए।सीजेआई ने कहा, "जजों को संवेदनशील होना चाहिए और पर्याप्त रिसर्च करनी चाहिए। बिना कानूनी पड़ताल के इस तरह के फैसले नहीं दिए जाने चाहिए। हम पटना हाईकोर्ट के फैसले की विस्तार से समीक्षा करेंगे और इस पर विस्तृत आदेश जारी करेंगे।"
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की सुनवाई के दौरान उठा मामला
सुप्रीम कोर्ट 14 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग लड़की का स्तन पकड़ना और उसके पायजामे की डोरी तोड़ना रेप का प्रयास नहीं माना जा सकता।इसी सुनवाई के दौरान अधिवक्ता गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान पटना हाईकोर्ट के हालिया फैसले की ओर दिलाया। इसके बाद शीर्ष अदालत ने इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे फैसलों की न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।
फैसलों पर उठ रहे हैं सवाल
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में हाल के कुछ न्यायिक फैसलों को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अदालतों को भारतीय दंड संहिता (या लागू कानूनों) की मंशा, पीड़िता के अधिकारों और अपराध की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शीर्ष अदालत पटना हाईकोर्ट के फैसले की समीक्षा में क्या निष्कर्ष निकालती है। यदि सुप्रीम कोर्ट इस आदेश को पलटता है, तो यह यौन अपराधों से जुड़े मामलों में भविष्य की न्यायिक व्याख्या के लिए महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।