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बिहार में नए शहर बसाने की तैयारी तेज, पहले होगा सोशल सर्वे, फिर शुरू होगी जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया; पाटलिपुत्र और हरिहरनाथपुर बनेगा पहला कोर एरिया

 

बिहार में आधुनिक शहरी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने नए नियोजित शहरों के विकास की प्रक्रिया तेज करते हुए पहले सोशल सर्वे और उसके बाद जमीन अधिग्रहण की रणनीति अपनाई है। इस योजना के तहत सबसे पहले पाटलिपुत्र में 3008 एकड़ और हरिहरनाथपुर में 2000 एकड़ भूमि पर कोर एरिया विकसित किया जाएगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में सोशल सर्वे का कार्य शुरू कर दिया गया है।

सोशल सर्वे से जुटाई जाएगी विस्तृत जानकारी

सरकार का उद्देश्य भूमि अधिग्रहण से पहले प्रभावित परिवारों और स्थानीय आबादी की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का आकलन करना है। सोशल सर्वे के दौरान यह जानकारी जुटाई जाएगी कि क्षेत्र में कितने परिवार रहते हैं, उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत क्या है, कितनी कृषि भूमि प्रभावित होगी और पुनर्वास की क्या आवश्यकता होगी। इसी आधार पर आगे की अधिग्रहण प्रक्रिया तय की जाएगी।

पाटलिपुत्र और हरिहरनाथपुर में बनेगा पहला कोर एरिया

योजना के अनुसार पहले चरण में पाटलिपुत्र क्षेत्र में 3008 एकड़ और हरिहरनाथपुर में 2000 एकड़ भूमि पर आधुनिक कोर एरिया विकसित किया जाएगा। यहां विश्वस्तरीय आधारभूत सुविधाएं, चौड़ी सड़कें, जल निकासी व्यवस्था, हरित क्षेत्र, आवासीय कॉलोनियां, व्यावसायिक परिसर, शैक्षणिक संस्थान और स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

जमीन अधिग्रहण से पहले लोगों की सहमति पर जोर

सरकार का कहना है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी। सोशल सर्वे के बाद प्रभावित लोगों से संवाद किया जाएगा और उन्हें मुआवजा, पुनर्वास तथा पुनर्स्थापन से जुड़ी सभी जानकारी दी जाएगी। प्रशासन का प्रयास रहेगा कि विकास कार्यों के साथ स्थानीय लोगों के हितों की भी पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

आधुनिक शहरों के विकास की बड़ी योजना

राज्य सरकार का लक्ष्य तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए योजनाबद्ध तरीके से नए शहर विकसित करना है। इससे भविष्य में बढ़ती आबादी के लिए बेहतर आवास, रोजगार और आधुनिक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। साथ ही राजधानी और आसपास के क्षेत्रों पर बढ़ते दबाव को भी कम करने में मदद मिलेगी।

रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने से निर्माण कार्यों के दौरान बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही बेहतर आधारभूत ढांचा तैयार होने से निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। नए औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों के विकसित होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

विकास और जनहित के बीच संतुलन पर जोर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि परियोजना का उद्देश्य केवल भूमि अधिग्रहण नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी के साथ सुनियोजित शहरी विकास करना है। सोशल सर्वे के आधार पर ही आगे की पूरी प्रक्रिया तय की जाएगी, ताकि विकास कार्यों के साथ प्रभावित परिवारों के अधिकारों और हितों का भी पूरा ध्यान रखा जा सके। इससे राज्य में आधुनिक और टिकाऊ शहरी विकास की नई दिशा तय होने की उम्मीद है।