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बिहार विधानसभा में फिर गरमाई सियासत, रामविलास पासवान को भारत रत्न देने की मांग

 

बिहार विधानसभा में बीते गुरुवार को दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री Ram Vilas Paswan को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। सदन में राजद विधायक कुमार सर्वजीत द्वारा पासवान को “बेचारा” कहे जाने के बाद राजद और लोजपा विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। इस बयान को लेकर काफी हंगामा हुआ और दोनों दलों के सदस्य आमने-सामने आ गए थे।

हालांकि, विवाद बढ़ने पर कुमार सर्वजीत ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका आशय अपमान करना नहीं था। उन्होंने “बेचारा” शब्द को सम्मानसूचक बताते हुए कहा कि उनका मकसद दिवंगत नेता के संघर्षों को रेखांकित करना था, न कि उन्हें कमतर आंकना। इसके बावजूद सदन में काफी देर तक शोर-शराबा चलता रहा।

इसी कड़ी में अब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक रणविजय साहू ने एक नई मांग रख दी है। उन्होंने कहा कि रामविलास पासवान ने दशकों तक दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों की आवाज बुलंद की और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।

रणविजय साहू के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने कहा कि पासवान का राजनीतिक जीवन संघर्षों से भरा रहा और उन्होंने केंद्र की कई सरकारों में मंत्री के रूप में अहम जिम्मेदारियां निभाईं। उनका योगदान केवल बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई।

रामविलास पासवान लंबे समय तक लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के प्रमुख रहे और केंद्र में विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उनके निधन के बाद भी बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव बना हुआ है। वर्तमान में Chirag Paswan के नेतृत्व में लोजपा सक्रिय है और पासवान की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करती है।

विधानसभा में हुए विवाद और उसके बाद भारत रत्न की मांग ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। लोजपा के कुछ नेताओं ने भी कहा है कि यदि कोई अपमानजनक टिप्पणी हुई है तो उसकी निंदा होनी चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी माना कि रामविलास पासवान के योगदान को देश स्तर पर उचित सम्मान मिलना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। बिहार की राजनीति में दलित और पिछड़ा वर्ग अहम भूमिका निभाते हैं, ऐसे में पासवान की विरासत पर होने वाली चर्चा राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल, भारत रत्न की मांग को लेकर आधिकारिक स्तर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विधानसभा में शुरू हुआ यह विवाद अब सम्मान और विरासत की बहस में बदलता नजर आ रहा है।