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पटना गर्ल्स हॉस्टल मामले में पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में, निजी ड्राइवर को भेजने का आरोप

 

पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़िता के परिजनों ने थाना पुलिस, खासकर एसएचओ रोशनी कुमारी पर लापरवाही और संवेदनहीनता के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस ने तीन दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।

पीड़िता के परिजनों के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलने के बाद वे लगातार थाना के चक्कर लगाते रहे, लेकिन पुलिस की ओर से न तो तत्काल जांच शुरू की गई और न ही घटनास्थल को सुरक्षित किया गया। आरोप है कि इस दौरान अहम सबूत नष्ट होने की आशंका बनी रही। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस सक्रिय होती, तो कई अहम साक्ष्य सुरक्षित किए जा सकते थे।

मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस टीम को भेजने के बजाय एक निजी ड्राइवर को हॉस्टल भेजा गया। परिजनों का आरोप है कि यह ड्राइवर पुलिस से जुड़ा हुआ नहीं था और न ही उसे किसी तरह की जांच की कानूनी अनुमति थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर किस हैसियत से एक निजी व्यक्ति को संवेदनशील घटनास्थल पर भेजा गया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका और गहरा गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आपराधिक मामले में घटनास्थल की सुरक्षा और वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाना बेहद जरूरी होता है। यदि इसमें लापरवाही होती है, तो न सिर्फ जांच प्रभावित होती है, बल्कि आरोपियों को फायदा मिलने की भी संभावना बढ़ जाती है।

पीड़िता के परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना है कि यदि पुलिस ही इस तरह की लापरवाही बरतेगी, तो पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा। साथ ही उन्होंने एसएचओ रोशनी कुमारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच की भी मांग की है।

वहीं पुलिस की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि मामला सामने आने के बाद वरीय अधिकारी पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब कर सकते हैं।

यह मामला न सिर्फ एक अपराध की जांच से जुड़ा है, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और भरोसे पर भी सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण में क्या कदम उठाता है और पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में कितनी गंभीरता दिखाता है।