पुलिस ने बच्चा चोरी की अफवाहों को बताया निराधार, भीड़ हिंसा से किया आगाह
बिहार के मुजफ्फरपुर में हाल ही में सोशल मीडिया और स्थानीय वार्ता में फैली बच्चा चोरी की अफवाहों ने स्थानीय लोगों में भय और दहशत पैदा कर दी थी। इस मामले को गंभीरता से देखते हुए, जिले के वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्र ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि इन अफवाहों का कोई वास्तविक आधार नहीं है।
एसपी कांतेश कुमार मिश्र ने बताया कि “मुजफ्फरपुर जिले में बच्चा चोरी के नाम पर फैल रही सारी अफवाहें निराधार हैं। इस तरह की गलत जानकारियों पर भरोसा करना और उनके कारण भीड़ इकट्ठा करना खतरनाक है। हम आमजन से अपील करते हैं कि वे इन अफवाहों में विश्वास न करें और अपने कार्यों में संयम बरतें।”
उन्होंने आगे कहा कि अफवाहों के फैलने और भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) के मामलों में गंभीर कानूनी कार्रवाई की जाती है। कानून के तहत ऐसे अपराधों में मृत्युदंड या आजीवन कारावास का प्रावधान है। इसके अलावा, जिन लोगों द्वारा अफवाह फैलाई जाती है, उनके खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।
पुलिस अधीक्षक ने आमजन से विशेष आग्रह किया कि वे सोशल मीडिया पर प्राप्त किसी भी जानकारी को तत्काल सच मानकर साझा न करें। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सबसे अच्छा तरीका यह है कि लोग स्थानीय पुलिस थाने से संपर्क करें और अफवाहों के फैलने से रोकने में सहयोग दें।
मुजफ्फरपुर में पिछले कुछ वर्षों में कई बार बच्चा चोरी और अन्य अफवाहों के कारण भीड़ हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें कुछ मामलों में निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस प्रकार की घटनाओं ने सामाजिक सुरक्षा और कानून के प्रति लोगों की जागरूकता की कमी को उजागर किया है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रशासन ने भी जनता से संयम बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि अफवाहें न केवल निर्दोष लोगों के जीवन को खतरे में डालती हैं, बल्कि सामाजिक माहौल को भी अस्थिर कर देती हैं।
एसपी कांतेश कुमार मिश्र ने यह भी बताया कि पुलिस जिले में लगातार गश्त कर रही है और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या घटना को देख कर सीधे पुलिस को सूचना दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अफवाहें अक्सर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और वॉट्सऐप ग्रुप्स के माध्यम से तेजी से फैलती हैं। इसलिए, लोगों को डिजिटल साक्षरता और सूचना की सत्यता को परखने की आवश्यकता है।
मुजफ्फरपुर के इस चेतावनी संदेश ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अफवाहों पर विश्वास करना और भीड़ बनाकर हिंसा करना अत्यंत खतरनाक है। पुलिस प्रशासन ने यह संदेश जनता तक पहुँचाने के लिए स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग भी शुरू कर दिया है।
इससे यह उम्मीद की जा रही है कि जिले में किसी भी तरह की भीड़ हिंसा और अफवाह फैलाने की घटनाओं में कमी आएगी और सामाजिक शांति बनी रहेगी।