पटना ADM और सब रजिस्ट्रार पत्नी के ठिकानों पर निगरानी का छापा, आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई
बिहार की राजधानी पटना में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने सोमवार को बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए ADM (सप्लाई) रविंद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी कुमारी स्विटी के ठिकानों पर छापेमारी की। कुमारी स्विटी दानापुर की जिला अवर निबंधक यानी सब-रजिस्ट्रार के पद पर तैनात हैं। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में कोर्ट से सर्च वारंट मिलने के बाद की गई। पटना और बेगूसराय स्थित उनके आवासों और अन्य परिसरों की तलाशी ली गई।
1 करोड़ से ज्यादा की आय से अधिक संपत्ति का मामला
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के मुताबिक, रविंद्र कुमार दिवाकर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने को लेकर निगरानी थाना कांड संख्या 113/26 दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में उनकी ज्ञात आय और संपत्ति के बीच करीब 1 करोड़ 6 लाख 85 हजार 900 रुपये की ऐसी संपत्ति का पता चलने की बात कही गई है, जिसे आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक माना गया। इसी आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने के बाद तलाशी की कार्रवाई की गई।
पटना और बेगूसराय में एक साथ तलाशी
निगरानी टीमों ने पटना और बेगूसराय में स्थित कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक, तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, जमीन और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज तथा निवेश संबंधी कागजात मिले हैं। इन दस्तावेजों की जांच की जा रही है, ताकि संपत्तियों के स्रोत और उनके वास्तविक मूल्य का पता लगाया जा सके।
महंगी घड़ियों का कलेक्शन भी मिला
तलाशी के दौरान अधिकारियों को बड़ी संख्या में महंगी ब्रांडेड घड़ियां भी मिलीं। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार करीब 48 घड़ियां बरामद हुई हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 6 लाख रुपये बताई गई है। वहीं अलग-अलग रिपोर्टों में बरामद नकदी की मात्रा को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, क्योंकि तलाशी और नकदी की गिनती की प्रक्रिया देर तक चलती रही।
कुछ रिपोर्टों में करीब 70 लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी दी गई है, जबकि अन्य अपडेट में कुल बरामद नकदी करीब 79 लाख रुपये बताई गई है। अंतिम आंकड़ा निगरानी विभाग की तलाशी और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।
संपत्तियों और दस्तावेजों की जांच जारी
निगरानी टीम अब बरामद दस्तावेजों, नकदी, आभूषण और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अधिकारियों के नाम या उनसे जुड़े लोगों के नाम पर मौजूद संपत्तियां उनकी ज्ञात आय के अनुरूप हैं या नहीं।
विजिलेंस की कार्रवाई अभी जांच के स्तर पर है। बरामदगी और दस्तावेजों के विस्तृत मूल्यांकन के बाद ही मामले में कुल संपत्ति और आय के बीच अंतर की तस्वीर साफ होगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।