राहुल–प्रियंका के ‘प्रेम’ के दीवाने पप्पू यादव, कांग्रेस में जिम्मेदारी की जताई इच्छा
बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से सांसद और जन अधिकार पार्टी के पूर्व नेता पप्पू यादव एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सियासी सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने खुलकर कांग्रेस नेतृत्व के प्रति अपना लगाव और समर्पण जाहिर किया है। पप्पू यादव ने कहा है कि वह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के प्रेम के दीवाने हैं और कांग्रेस पार्टी में किसी न किसी तरह की जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं।
पप्पू यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी इच्छा है कि उन्हें आगामी असम विधानसभा चुनाव में पार्टी की ओर से कोई जिम्मेदारी दी जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय विचारधारा वाली पार्टी है और राहुल-प्रियंका का संघर्ष उन्हें बेहद प्रेरित करता है। पप्पू यादव के इस बयान को कांग्रेस के प्रति उनके बढ़ते झुकाव और राजनीतिक भविष्य की नई दिशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पप्पू यादव की इस इच्छा के पूरे होने की संभावना काफी कम है। इसकी सबसे बड़ी वजह उनका राजनीतिक अतीत और बार-बार दल बदलने का रिकॉर्ड बताया जा रहा है। पप्पू यादव पहले कांग्रेस, फिर राजद, उसके बाद अपनी अलग पार्टी और अब एक बार फिर कांग्रेस के नजदीक आते नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो पार्टी फिलहाल किसी ऐसे नेता को बड़ी जिम्मेदारी देने से बच रही है, जिनकी छवि विवादों से जुड़ी रही हो या जिनकी संगठनात्मक निष्ठा पर सवाल उठते रहे हों। यही वजह है कि पप्पू यादव के बयान के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अब तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है।
पप्पू यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह पद या कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि विचारधारा और संघर्ष के लिए कांग्रेस के साथ हैं। उन्होंने दावा किया कि वह जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए काम करने को तैयार हैं और जहां भी जरूरत होगी, वहां योगदान देंगे।
हालांकि, उनके इस बयान को लेकर बिहार की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोग इसे कांग्रेस में अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश बता रहे हैं, तो कुछ इसे आने वाले समय में किसी बड़े राजनीतिक कदम की भूमिका मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि असम चुनाव जैसे बड़े और संवेदनशील राज्य में कांग्रेस नेतृत्व किसी बाहरी या विवादित चेहरे को जिम्मेदारी सौंपने से पहले कई बार सोच सकता है। पार्टी फिलहाल स्थानीय नेताओं और पुराने संगठनात्मक ढांचे पर ज्यादा भरोसा जता रही है।
गौरतलब है कि पप्पू यादव अपनी बेबाक बयानबाजी और जमीनी राजनीति के लिए जाने जाते हैं। वह अक्सर केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ मुखर रहते हैं, लेकिन कांग्रेस के भीतर उन्हें लेकर हमेशा संकोच की स्थिति बनी रही है।
ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पप्पू यादव के इस खुले समर्थन और भावनात्मक अपील का कांग्रेस नेतृत्व पर कोई असर पड़ता है या नहीं। फिलहाल, उनके बयान ने सियासी हलकों में जरूर हलचल पैदा कर दी है, लेकिन जिम्मेदारी मिलने की राह अभी भी काफी मुश्किल नजर आ रही है।