पटना में सफाई व्यवस्था ठप: 5 हजार से ज्यादा कर्मियों की हड़ताल, 75 वार्डों में 750 टन कचरा जमा
बिहार की राजधानी पटना में दैनिक कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पटना नगर निगम के 5 हजार से अधिक सफाईकर्मी और 275 वाहन चालक स्थायीकरण की मांग को लेकर काम बंद कर हड़ताल पर बैठे हैं। इसका सीधा असर शहर के सभी 75 वार्डों में दिखाई दे रहा है, जहां पिछले कई दिनों से कूड़ा उठाव पूरी तरह ठप पड़ा है।
शहरभर में कचरे के ढेर
हड़ताल के कारण मुख्य सड़कों से लेकर मोहल्लों की गलियों तक कूड़े के ढेर लग गए हैं। बोरिंग रोड, पाटलिपुत्र गोलंबर, पुनाईचक, कंकड़बाग, बांकीपुर, राजेंद्र नगर टर्मिनल और पटना सिटी सहित कई प्रमुख इलाकों में कचरा प्वाइंट बन चुके हैं। जगह-जगह फैले कचरे से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
5 दिनों में 750 टन कचरा जमा
नगर निगम की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से पिछले पांच दिनों में करीब 750 टन कूड़ा-कचरा शहर में जमा हो चुका है। लगातार हो रही बारिश के कारण कचरा भीगकर सड़ने लगा है। वहीं धूप निकलने पर इससे उठने वाली दुर्गंध ने आसपास रहने वाले लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।
संक्रमण फैलने का बढ़ा खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरे के ढेरों के कारण मच्छर, मक्खियों और अन्य कीटों की संख्या बढ़ रही है। लोगों को आशंका है कि यदि जल्द सफाई नहीं हुई तो संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। कई इलाकों में बदबू के कारण लोगों का घरों से निकलना भी मुश्किल हो गया है।
स्थायीकरण की मांग पर अड़े कर्मचारी
हड़ताल पर बैठे दैनिक कर्मियों की प्रमुख मांग उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की है। कर्मचारी संगठन का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
नगर निगम का दावा- काम जारी है
हालांकि, पटना नगर निगम का दावा है कि सफाई कार्य पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और कर्मचारी काम कर रहे हैं। लेकिन शहर के विभिन्न इलाकों की स्थिति निगम के इस दावे से अलग नजर आ रही है। सड़कों और गलियों में जमा कचरा सफाई व्यवस्था की बदहाल स्थिति को साफ तौर पर बयां कर रहा है।
अब लोगों की नजरें नगर निगम और प्रशासन पर टिकी हैं कि हड़ताल का समाधान कब निकलेगा और शहर की सफाई व्यवस्था कब सामान्य हो सकेगी।