चमकी बुखार से बच्चों की मौत पर बिहार में आक्रोश, नेताओं के दौरे पर भड़के लोग
बिहार इस समय चमकी बुखार (Acute Encephalitis Syndrome) के प्रकोप से जूझ रहा है। इस गंभीर बीमारी के कारण राज्य में अब तक सवा सौ से अधिक बच्चों की मौत की खबर ने पूरे प्रदेश को गमगीन कर दिया है। लगातार हो रही इन मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस दुखद माहौल के बीच अब राजनीतिक नाराजगी भी खुलकर सामने आने लगी है। मुजफ्फरपुर में करीब 130 बच्चों की मौत के बाद जब जनप्रतिनिधि हालात का जायजा लेने पहुंचे, तो स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने नेताओं के दौरे का जमकर विरोध किया और अपनी नाराजगी व्यक्त की।
वैशाली जिले के हरिवंशपुर गांव में स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई, जहां लोगों ने एलजेपी सांसद पशुपति पारस और विधायक राजकुमार साह का विरोध किया। ग्रामीणों का कहना है कि जब बच्चे इलाज के लिए जूझ रहे थे, तब नेताओं ने समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, लेकिन अब दौरा करने पहुंचे हैं।
इस बीच, गांव में एक अनोखा विरोध भी देखने को मिला, जहां लोगों ने केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के ‘लापता’ होने के पोस्टर लगाए। इतना ही नहीं, पोस्टर में यह घोषणा भी की गई कि जो व्यक्ति उनके बारे में जानकारी देगा, उसे 15 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। यह विरोध नेताओं के प्रति लोगों के गुस्से और निराशा को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बीमारी से बच्चों की लगातार हो रही मौतों ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। वे सरकार से तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, ताकि इस बीमारी पर काबू पाया जा सके और भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि चमकी बुखार (Acute Encephalitis Syndrome) जैसी बीमारी से निपटने के लिए समय पर इलाज, जागरूकता और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद जरूरी है। वहीं, राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से भी यह अपेक्षा की जाती है कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर गंभीरता दिखाएं।
कुल मिलाकर, बिहार में चमकी बुखार से बच्चों की मौत ने जहां एक ओर पूरे राज्य को झकझोर दिया है, वहीं दूसरी ओर लोगों के गुस्से और आक्रोश ने राजनीतिक माहौल को भी गर्मा दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्रशासन इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।