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नीतीश मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्य से समझेंगे सारण का हाल, लालू यादव के क्षेत्र में विकास की तैयारी

 

बिहार की राजनीति और विकास की दिशा को समझने के लिए अब नज़रें सारण जिले पर टिकी हैं। खास तौर पर छपरा स्थित नीतीश मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH) को सारण के समग्र स्वास्थ्य तंत्र का आईना माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस मेडिकल कॉलेज की स्थिति, सुविधाएं और कार्यप्रणाली से यह तय होगा कि सारण जिले में स्वास्थ्य सेवाएं किस दिशा में आगे बढ़ रही हैं। खास बात यह है कि सारण राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का परंपरागत क्षेत्र रहा है, ऐसे में यहां विकास की आहट राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम मानी जा रही है।

नीतीश कुमार सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर लगातार सुधार के दावे कर रही है। मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, डॉक्टरों की नियुक्ति और अत्याधुनिक सुविधाओं के नाम पर बड़े-बड़े ऐलान किए गए हैं। अब इन्हीं दावों की असल परीक्षा नीतीश मेडिकल कॉलेज में होती दिख रही है। सरकार की मंशा है कि इस संस्थान को उत्तर बिहार के बड़े स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, ताकि न सिर्फ सारण बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को भी बेहतर इलाज मिल सके।

नीतीश मेडिकल कॉलेज में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नए विभाग खोलने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की योजनाएं चर्चा में हैं। अगर ये योजनाएं ज़मीन पर उतरती हैं, तो इसका सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा। लंबे समय से यहां के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पटना या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होना बड़ी राहत माना जा रहा है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह कदम बेहद मायने रखता है। सारण को लालू यादव का गढ़ माना जाता है और यहां विकास कार्यों को लेकर हमेशा सियासी संदेश निकाले जाते रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार सरकार इस क्षेत्र में स्वास्थ्य के क्षेत्र में ठोस बदलाव लाने में सफल होती है, तो इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। विकास की बयार अगर लालू यादव के क्षेत्र में बहती है, तो यह सियासी संदेश देने वाला कदम होगा।

स्थानीय लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेज का नाम भले ही बड़े नेता के नाम पर हो, लेकिन अब जरूरत है कि यहां सुविधाएं भी उसी स्तर की हों। डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाइयों की व्यवस्था और आधुनिक जांच सुविधाएं अगर बेहतर होती हैं, तो सरकार के विकास के दावे मजबूत होंगे।

हालांकि, विपक्ष इसे सिर्फ राजनीतिक दिखावा भी बता रहा है। उनका कहना है कि चुनाव नजदीक आते ही विकास की बातें तेज हो जाती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर अलग होती है। ऐसे में नीतीश मेडिकल कॉलेज सरकार की नीयत और नीतियों की असली परीक्षा बनता जा रहा है।