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नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं, फुटेज में देंखे तेजस्वी यादव ने लगाया भाजपा पर आरोप

 

बिहार के मुख्यमंत्री **नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए अपनी दावेदारी का ऐलान कर दिया है। उन्होंने यह जानकारी खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की। नीतीश ने लिखा कि संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही उनके मन में यह इच्छा थी कि वे बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के सदस्य भी बनें। इसी क्रम में इस बार होने वाले चुनाव में वे राज्यसभा का सदस्य बनना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार की नई सरकार को उनका पूर्ण समर्थन रहेगा।

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नीतीश कुमार के इस ऐलान के तुरंत बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। **तेजस्वी यादव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिहार में भाजपा ने महाराष्ट्र मॉडल लागू किया है। उनका आरोप है कि भाजपा ने नीतीश कुमार को इतना दबाव और टॉर्चर दिया कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ रहा है। तेजस्वी ने कहा कि भाजपा अपनी सहयोगी पार्टी को समाप्त करने की कोशिश कर रही है।

राजनीतिक गतिविधियों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री **अमित शाह मुख्यमंत्री निवास पहुंचे। इसके बाद नीतीश कुमार उनके साथ नामांकन प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री आवास से निकले। इस कदम को बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना उनकी राजनीतिक स्थिति और केंद्र सरकार के साथ संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। राज्यसभा में उनकी मौजूदगी बिहार और केंद्र सरकार के बीच नीतिगत तालमेल के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं विपक्ष ने इसे राजनीतिक सत्ता के दांव के रूप में देखा है।

नीतीश कुमार के बयान से यह भी साफ हुआ कि उनका मुख्य उद्देश्य केवल व्यक्तिगत राजनीतिक करियर नहीं है, बल्कि बिहार की नई सरकार के साथ सहयोग सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने अपने समर्थन का आश्वासन देते हुए कहा कि राज्यसभा सदस्य बनने के बाद भी वे बिहार के हितों के लिए काम करते रहेंगे।

वहीं, तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया से राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। उनके आरोपों के मुताबिक भाजपा ने सहयोगी दल पर दबाव बनाकर उसे कमजोर करने की रणनीति अपनाई है। यह बयान आगामी चुनावों और बिहार में राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।

नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की राजनीति में कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। एक तरफ जहां उनका राज्यसभा जाना केंद्रीय स्तर पर उनकी राजनीतिक सक्रियता को बढ़ाएगा, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इसे केंद्र और राज्य के बीच सत्ता संघर्ष के रूप में देख रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नए सियासी दांव-पेंच और रणनीतियों की संभावनाओं को जन्म दिया है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राज्यसभा में नीतीश कुमार की भूमिका केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश की राष्ट्रीय राजनीति में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। आने वाले महीनों में बिहार में इस बदलाव का असर विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारियों पर भी पड़ सकता है।