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साहिबगंज-जमालपुर पैसेंजर ट्रेन में नवजात शिशु मिला, आरपीएफ ने बचाई जान

 

भागलपुर में साहिबगंज-जमालपुर पैसेंजर ट्रेन के बाथरूम में एक नवजात शिशु को लावारिस अवस्था में छोड़े जाने का मामला सामने आया। सौभाग्य से नाथनगर रेलवे स्टेशन पर तैनात आरपीएफ हेड कांस्टेबल राजेश कुमार और कांस्टेबल शैलेंद्र कुमार की सतर्कता ने बच्चे की जान बचा ली।

जानकारी के अनुसार, ट्रेन के बाथरूम में एक नवजात को अकेला और लाचार छोड़ दिया गया था। आरपीएफ जवानों ने बच्चे को तुरंत देखा और उसे सुरक्षित स्थान पर निकालकर प्राथमिक देखभाल प्रदान की। उनका त्वरित और सतर्क प्रयास बच्चे की जान बचाने में निर्णायक साबित हुआ।

आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि नवजात शिशु को सुरक्षित निकालने के बाद चाइल्ड लाइन को सूचित किया गया। चाइल्ड लाइन की टीम ने मौके पर पहुंचकर बच्चे की देखभाल शुरू की और उसे स्वास्थ्य जांच के लिए निकटतम अस्पताल भेजा।

रेलवे पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि यह घटना रेलवे सुरक्षा और कर्मचारियों की सतर्कता की मिसाल पेश करती है। उन्होंने यात्रियों से अपील की है कि किसी भी बच्चे या असहाय व्यक्ति को लावारिस न छोड़ें और तुरंत रेलवे अधिकारियों या सुरक्षा कर्मचारियों को सूचित करें।

विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात बच्चों की सुरक्षा के लिए समय पर कदम उठाना बेहद जरूरी है। ट्रेन, बस या सार्वजनिक स्थानों पर लावारिस शिशु का मिलना गंभीर मामला है और इसमें त्वरित कार्रवाई से जीवन बचाया जा सकता है।

स्थानीय लोगों और यात्रियों ने भी आरपीएफ जवानों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनकी तत्परता और जिम्मेदाराना कार्रवाई ने नवजात की जान बचाई है। इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की भूमिका को उजागर किया है।

आरपीएफ ने आगे कहा कि नवजात की पूरी जानकारी रिकॉर्ड की जा रही है और उसके परिजनों की पहचान करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। अगर परिजन नहीं मिलते हैं, तो बच्चे को सरकारी शिशु गृह में सुरक्षित रखा जाएगा।

रेलवे प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सभी स्टाफ को सतर्क रहने और ऐसी परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही यात्रियों को भी सुरक्षा और जागरूकता बनाए रखने की अपील की गई है।

इस प्रकार, भागलपुर में साहिबगंज-जमालपुर पैसेंजर ट्रेन में लावारिस पाए गए नवजात शिशु की सुरक्षा और बचाव में आरपीएफ जवानों की सतर्कता और तत्परता ने एक नई मिसाल पेश की है। यह घटना दर्शाती है कि समय पर सही कदम उठाना बच्चों और असहाय व्यक्तियों की सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।