☰
×

बिहार MLC चुनाव से पहले NDA की बड़ी बैठक, सम्राट चौधरी के आवास पर बनी रणनीति; बागियों को साधने पर जोर

 

बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आठ सीटों पर होने वाले स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA ने अपनी चुनावी रणनीति पर मंथन किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर बुधवार शाम गठबंधन के प्रमुख नेताओं की अहम बैठक हुई। बैठक में चुनाव में गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने और सभी सीटों पर समन्वय के साथ चुनाव प्रचार करने को लेकर चर्चा हुई।

साझा प्रचार पर दिया गया जोर

बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटक दलों के नेताओं से चुनाव में मिलकर प्रचार करने पर जोर दिया। चर्चा में यह बात सामने आई कि अलग-अलग दलों के बजाय गठबंधन को प्राथमिकता देते हुए संयुक्त रूप से चुनाव मैदान में उतरना चाहिए।

NDA के नेताओं ने सभी आठ सीटों पर चुनावी तैयारियों को लेकर भी चर्चा की। गठबंधन में भाजपा और जेडीयू चार-चार सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। 23 अक्टूबर को मतदान होना है, जबकि 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।

बागियों को मनाने की भी कोशिश

बैठक में गठबंधन के भीतर उम्मीदवारों को लेकर सामने आए विवाद और बगावत के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। NDA ने अपने-अपने घटक दलों से बागी उम्मीदवारों को नामांकन वापस कराने की दिशा में पहल करने को कहा है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है।

जेडीयू से जुड़े नीरज कुमार और अनंत सिंह के विवाद के अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा से जुड़े उम्मीदवार के नामांकन का मुद्दा भी बैठक में उठा। गठबंधन के नेताओं ने संबंधित दलों के शीर्ष नेतृत्व से अपने-अपने स्तर पर इन मामलों को सुलझाने की अपेक्षा जताई।

9 अक्टूबर को फिर जुटेंगे NDA नेता

बैठक के दौरान 9 अक्टूबर को NDA विधानमंडल दल की बैठक बुलाने का फैसला भी किया गया। यह बैठक मुख्यमंत्री आवास पर होगी। इसमें NDA के विधायक और सांसद शामिल होंगे। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी रणनीति को आगे बढ़ाने और प्रचार अभियान को लेकर दिशा-निर्देश दिए जाने की संभावना है।

आठ सीटों पर चुनाव, बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए होने वाला यह चुनाव स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़ा है। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही NDA और विपक्षी दलों की गतिविधियां बढ़ गई हैं।

NDA की बैठक में जिस तरह साझा प्रचार और गठबंधन के भीतर मतों के बिखराव को रोकने पर जोर दिया गया, उससे साफ है कि चुनाव से पहले घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय बनाने की कोशिश की जा रही है। अब 9 अक्टूबर की बैठक और नामांकन वापसी की प्रक्रिया के बाद चुनावी तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।