एनबीसीसी और डीडीए ने ओल्ड राजिंदर नगर और सफदरजंग में स्टाफ क्वार्टरों के पुनर्विकास के लिए किए एमओयू पर हस्ताक्षर
भारत सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन कार्यरत नवरत्न सीपीएसई, एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने राजधानी के दो प्रमुख क्षेत्रों में विकास के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के साथ दो अलग-अलग समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये क्षेत्र हैं नई दिल्ली का ओल्ड राजिंदर नगर और सफदरजंग विकास क्षेत्र, जहां डीडीए के स्टाफ क्वार्टरों का व्यापक पुनर्विकास किया जाएगा।
एमओयू पर हस्ताक्षर समारोह में एनबीसीसी और डीडीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य इन क्षेत्रों में पुराने और जीर्ण-शीर्ण स्टाफ क्वार्टरों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक आवास में परिवर्तित करना है। इस परियोजना से न केवल इन क्षेत्रों का बुनियादी ढांचा सुधरेगा, बल्कि निवासियों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।
एनबीसीसी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “ओल्ड राजिंदर नगर और सफदरजंग विकास क्षेत्र के स्टाफ क्वार्टरों का पुनर्विकास एक दृष्टिगोचर मॉडल साबित होगा। इसमें आधुनिक वास्तुकला, स्मार्ट निर्माण तकनीक और टिकाऊ निर्माण सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इससे नए क्वार्टर सुरक्षित, पर्यावरण के अनुकूल और आरामदायक होंगे।”
डीडीए के अधिकारियों ने कहा कि यह परियोजना स्टाफ की भलाई और कार्यक्षमता बढ़ाने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। पुराने क्वार्टरों में रहने वाले कर्मचारियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एनबीसीसी इस पुनर्विकास परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा करेगी। परियोजना के दौरान, निवासियों को अस्थायी आवास सुविधा भी प्रदान की जाएगी ताकि उनका दैनिक जीवन प्रभावित न हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम राजधानी में शहरी नियोजन और स्मार्ट सिटी निर्माण के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। पुराने आवासीय क्षेत्रों का पुनर्विकास न केवल संपत्ति का मूल्य बढ़ाता है, बल्कि शहर में सौंदर्य और बुनियादी ढांचे को भी आधुनिक बनाता है।
एमओयू के तहत परियोजना में पार्किंग, खेल और मनोरंजन सुविधाएं, हरित क्षेत्र और जल प्रबंधन प्रणालियों का समावेश किया जाएगा। इससे न केवल निवासियों के जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि शहर की पर्यावरणीय स्थिरता और जीवन गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
एनबीसीसी और डीडीए ने यह भी आश्वासन दिया कि परियोजना में समयबद्ध योजना और पारदर्शिता का पालन किया जाएगा। सभी निर्माण और विकास गतिविधियां नियमों के अनुसार होंगी और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
इस समझौते से संकेत मिलता है कि दिल्ली में सरकारी स्टाफ क्वार्टरों का सुधार और आधुनिकीकरण तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ओल्ड राजिंदर नगर और सफदरजंग विकास क्षेत्र की यह परियोजना भविष्य में अन्य सरकारी आवासीय परियोजनाओं के लिए भी मार्गदर्शक साबित होगी।
इस प्रकार, एनबीसीसी और डीडीए के बीच हुए इस एमओयू से राजधानी के पुराने सरकारी आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा, सुविधा और आधुनिकता के नए मानक स्थापित होने की उम्मीद है।