मुजफ्फरपुर में 100 से ज्यादा जीविका दीदियों से ठगी का मामला, कोर्ट ने बैंक से मांगे लोन के कागजात; 23 सितंबर को अगली सुनवाई
बिहार के मुजफ्फरपुर में जीविका दीदियों के नाम पर करोड़ों रुपये के कथित लोन और ठगी के मामले में अब प्रशासनिक और न्यायिक कार्रवाई तेज हो गई है। बोचहां और मुशहरी की 100 से ज्यादा जीविका दीदियों से जुड़े इस मामले में एसडीओ पूर्वी की अदालत में सुनवाई हुई। कोर्ट ने संबंधित बैंकों से लोन से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज और कागजात प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही जीविका की जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) अनीशा से भी दीदियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।
मशरूम उत्पादन के नाम पर लोन का आरोप
मामला मशरूम उत्पादन और स्मार्ट हट से जुड़ी योजना का बताया जा रहा है। शिकायत करने वाली महिलाओं का आरोप है कि उन्हें रोजगार और स्वरोजगार दिलाने के नाम पर योजना समझाई गई और उनके नाम पर बैंक से लोन कराया गया। आरोप है कि लोन की राशि लाभुक महिलाओं को देने के बजाय संबंधित एजेंसी के खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 110 जीविका दीदियों के नाम पर लगभग 3.63 करोड़ रुपये के लोन से जुड़े आरोप सामने आए हैं। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान मुख्य आरोपी आशुतोष मंगलम को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक लोन और बैंक खातों में हुए लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
दीदियों पर बढ़ता जा रहा कर्ज
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्हें जिस रोजगार योजना के लिए लोन दिलाया गया था, उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला। कई महिलाओं के मुताबिक लोन की रकम बढ़ती चली गई और ब्याज जुड़ने के कारण आर्थिक बोझ और ज्यादा हो गया।
एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ महिलाओं को मशरूम उत्पादन के लिए 3.5 लाख रुपये तक का कर्ज दिया गया था, जो समय बीतने के साथ बढ़कर करीब 6 लाख रुपये तक पहुंच गया। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें न तो निर्धारित तरीके से मशरूम उत्पादन की सुविधा मिली और न ही उससे होने वाली आमदनी।
कोर्ट ने बैंक से मांगे सभी दस्तावेज
16 सितंबर को हुई सुनवाई में एसडीओ आनंद उत्सव ने बैंक प्रतिनिधियों को लोन से संबंधित सभी आवश्यक कागजात पेश करने का निर्देश दिया। इसके अलावा जीविका डीपीएम से भी महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। सुनवाई के दौरान पीड़ित जीविका दीदियां, बैंक प्रतिनिधि और डीपीएम मौजूद रहीं।
महिलाओं की ओर से बैंक से नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने की मांग भी की जा रही है। उनका कहना है कि जब उन्हें योजना के तहत रोजगार या उत्पादन का लाभ नहीं मिला, तो लोन चुकाने की जिम्मेदारी उन पर क्यों हो।
23 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित की गई है। पीड़ित महिलाओं ने कहा है कि वह लंबे समय से मामले के समाधान का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने मांग की है कि उनके नाम पर लिए गए कर्ज को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए और उन्हें आर्थिक राहत दी जाए।
महिलाओं ने यह भी मांग उठाई है कि मामले में जिम्मेदारी तय की जाए। उनका कहना है कि यदि 23 सितंबर को उन्हें राहत नहीं मिलती है तो वे आंदोलन और आमरण अनशन का रास्ता अपना सकती हैं। फिलहाल कोर्ट में बैंक दस्तावेज और संबंधित अधिकारियों के जवाब के आधार पर मामले की आगे की कार्रवाई तय होगी।