सहरसा में साइबर अपराध मामले पर विधायक का आरोप, बोले- 2 लाख रुपये लेकर आरोपी को छोड़ा; आंदोलन की चेतावनी
बिहार के सहरसा में साइबर अपराध के एक मामले को लेकर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विधायक आईपी गुप्ता ने साइबर थाना पुलिस और संबंधित अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। विधायक का आरोप है कि साइबर अपराध के मामले में गिरफ्तार किए गए एक युवक को पुलिस ने कथित तौर पर 2 लाख रुपये रिश्वत लेकर छोड़ दिया।
विधायक आईपी गुप्ता ने कहा कि जब उन्होंने मामले में हस्तक्षेप करते हुए पुलिस अधिकारियों से युवक को नहीं छोड़ने की बात कही थी, तब भी आरोपी को हिरासत से मुक्त नहीं किया गया था। लेकिन बाद में कथित रूप से पैसे लेकर उसे छोड़ दिया गया। विधायक ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है।
पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
विधायक ने आरोप लगाया कि साइबर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि यदि साइबर अपराध जैसे गंभीर मामलों में भी पैसे लेकर कार्रवाई प्रभावित की जाएगी तो आम लोगों का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होगा।
आईपी गुप्ता ने संबंधित अधिकारियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
आंदोलन की दी चेतावनी
विधायक ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वह साइबर थाना पुलिस और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी और जनता के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है।
पुलिस की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार
विधायक के आरोपों के बाद अब पुलिस विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आरोपी को किन परिस्थितियों में छोड़ा गया।
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में पुलिस पर लगे रिश्वत के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज
सहरसा में इस मामले को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। विधायक के आरोपों के बाद विपक्ष और स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
फिलहाल मामला आरोप और जांच के बीच है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं, पुलिस की जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।