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बिहार में ‘मिशन वात्सल्य’ पोर्टल से बड़ा खुलासा: 8,000 से अधिक लापता बच्चों की जानकारी सामने, मानव तस्करी के खिलाफ अभियान तेज

 

बिहार में बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी के खिलाफ चल रही सरकारी मुहिम के तहत एक बड़ा खुलासा सामने आया है। ‘मिशन वात्सल्य’ पोर्टल के हालिया अपडेट में राज्य भर में 8,000 से अधिक लापता बच्चों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उजागर हुई है। इस डेटा ने प्रशासन और पुलिस विभाग में गंभीर चिंता बढ़ा दी है।

सूत्रों के अनुसार, पोर्टल पर विभिन्न जिलों से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण में यह सामने आया कि कई मामलों में बच्चों की गुमशुदगी की जानकारी समय पर अपडेट नहीं की गई थी या फिर रिकॉर्डिंग में खामियां पाई गईं। इसके बाद राज्य पुलिस मुख्यालय ने सभी थानों को निर्देश जारी किए हैं कि वे मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017 के प्रावधानों के तहत सभी आवश्यक जानकारी समय पर पोर्टल पर अपलोड करें और डेटा को नियमित रूप से अपडेट रखें।

अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड को दुरुस्त करना नहीं है, बल्कि लापता बच्चों की जल्द पहचान और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना भी है। बाल संरक्षण इकाइयों को भी सक्रिय किया गया है ताकि हर जिले में मामलों की समीक्षा तेजी से की जा सके।

इसी बीच, मानव तस्करी के खिलाफ राज्य में चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘नया सवेरा 2.0’ ने भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस अभियान के तहत पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने अब तक 400 से अधिक पीड़ितों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया है। इनमें महिलाएं और बच्चे दोनों शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग राज्यों में ले जाकर जबरन श्रम या अन्य अवैध गतिविधियों में लगाया गया था।

अभियान के दौरान कई मानव तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है और उनके नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तस्करी का यह नेटवर्क केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराज्यीय स्तर तक जुड़े हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मिशन वात्सल्य’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और ‘नया सवेरा 2.0’ जैसे अभियानों से प्रशासन को जमीनी स्तर पर स्थिति समझने और त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिल रही है। हालांकि, लापता बच्चों की बड़ी संख्या ने सिस्टम की चुनौतियों को भी उजागर किया है।

सरकार ने आश्वासन दिया है कि लापता बच्चों की खोज को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, आम जनता से भी अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

बिहार में बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी के खिलाफ यह संयुक्त प्रयास आने वाले समय में और अधिक मजबूत किए जाने की उम्मीद है, ताकि हर बच्चे का सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।