KGMU में मजारें फिलहाल नहीं हटाई जाएंगी, प्रशासन ने रमजान को ध्यान में रखकर लिया फैसला
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में मजारों को लेकर नया निर्णय सामने आया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मजारों को हटाने की कार्रवाई स्थगित की गई है।
जानकारी के मुताबिक, पहले KGMU प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर में बनी मजारों को हटाने के लिए 28 फरवरी, 2026 तक का समय दिया था। यह कदम विश्वविद्यालय परिसर में अवैध मजारों के मामले को लेकर उठाया गया था। हालांकि, प्रशासन ने रमजान के पवित्र महीने को ध्यान में रखते हुए अब इसे फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है।
विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह फैसला धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं का सम्मान करते हुए लिया गया है। उन्होंने बताया कि रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय के छात्रों और स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक गतिविधियों और पूजा स्थलों का महत्व अधिक होता है। ऐसे में मजारों को अचानक हटाने से विवाद और असुविधा उत्पन्न हो सकती थी।
स्थानीय छात्रों और कर्मचारियों ने भी प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह कदम विश्वविद्यालय में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए उचित है। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि आगे भी सभी कदमों में सामाजिक और धार्मिक संवेदनाओं का ध्यान रखा जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में अवैध निर्माण और धार्मिक स्थल को लेकर विवाद बढ़ने की संभावना हमेशा रहती है। ऐसे मामलों में प्रशासनिक निर्णय लेते समय संतुलन बनाए रखना और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक होता है। KGMU का यह फैसला इस दृष्टिकोण का उदाहरण माना जा सकता है।
हालांकि, विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह स्थगन केवल समय की दृष्टि से है और लंबी अवधि में मजारों के अवैध निर्माण पर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने कहा कि रमजान समाप्त होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में समीक्षा और उचित कदम उठाए जाएंगे।
KGMU में मजारों को लेकर यह विवाद पिछले कुछ हफ्तों से चर्चा में रहा है। पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने अवैध मजारों को हटाने के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन कई छात्रों और स्थानीय समुदाय ने विरोध जताया था। इसके बाद प्रशासन ने रमजान के पवित्र महीने को देखते हुए कार्रवाई स्थगित करने का निर्णय लिया।
स्थानीय मीडिया और छात्रों ने इस फैसले को संतुलित और समझदारी भरा कदम बताया है। उनका कहना है कि यह विश्वविद्यालय प्रशासन की सभी पक्षों की भावनाओं और धार्मिक संवेदनाओं का सम्मान करने की नीति को दर्शाता है।
इस निर्णय के बाद अब विश्वविद्यालय परिसर में शांति का माहौल बन गया है। प्रशासन ने छात्रों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे इस दौरान संयम बनाए रखें और विवाद या अफवाहों पर ध्यान न दें।
KGMU का यह कदम यह दर्शाता है कि बड़े विश्वविद्यालयों में निर्णय लेते समय सुरक्षा, कानून और सामाजिक-सांस्कृतिक संवेदनाओं के बीच संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।