बिहार में अपराधियों पर कसेगा शिकंजा, पेपर लीक और मानव तस्करी समेत कई अपराध CCA के दायरे में
बिहार सरकार ने असामाजिक तत्वों और संगठित अपराध पर लगाम लगाने के लिए अपराध नियंत्रण कानून यानी CCA में बड़ा बदलाव किया है। संशोधित प्रावधानों के बाद अब पेपर लीक, मानव तस्करी, अवैध खनन, संगठित कदाचार और सार्वजनिक संपत्ति को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में शामिल आरोपियों के खिलाफ भी CCA के तहत कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने इसके साथ जिलाधिकारियों के अधिकारों में भी बढ़ोतरी की है।
सात तरह के अपराधों पर हो सकेगी कार्रवाई
संशोधित प्रावधानों में अपराध की कई नई श्रेणियों को शामिल किया गया है। सार्वजनिक या निजी संपत्ति पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा करने या उसे बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। इसके अलावा भू-माफिया, अवैध खनन में शामिल लोग, संगठित कदाचार या पेपर लीक करने वाले गिरोह, मानव तस्करी में शामिल अपराधी और सोशल मीडिया के जरिए जाति, धर्म या समुदाय के नाम पर घृणा फैलाने वाले लोगों को भी CCA के दायरे में लाया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से ऐसे अपराधों पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाया जा सकेगा, जिनका असर सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि समाज और कानून व्यवस्था पर भी पड़ता है।
डीएम के अधिकार बढ़ाए गए
संशोधित कानून के तहत जिलाधिकारियों को भी पहले की तुलना में अधिक अधिकार दिए गए हैं। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ CCA की कार्रवाई के लिए कुछ निर्धारित शर्तें पूरी होना जरूरी होगा। बीते पांच वर्षों के दौरान संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कम से कम दो मामलों में पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने और उस अवधि में कम से कम एक मामले में दोषसिद्धि होने जैसी शर्त रखी गई है।
CCA के तहत जिलाधिकारी किसी आरोपी को अधिकतम छह महीने के लिए जिले या निर्धारित क्षेत्र से बाहर करने का आदेश दे सकते हैं। परिस्थितियों की समीक्षा के बाद इस अवधि को आगे भी छह-छह महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है। ऐसे आदेशों के खिलाफ संबंधित व्यक्ति को प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष अपील करने का अधिकार रहेगा।
पेपर लीक और मानव तस्करी पर विशेष नजर
बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार उठते सवालों के बीच पेपर लीक और संगठित कदाचार को CCA के दायरे में लाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पेपर लीक में संगठित रूप से शामिल गिरोहों के खिलाफ प्रशासन को अधिक सख्त कार्रवाई करने का रास्ता मिलेगा।
वहीं मानव तस्करी को भी गंभीर अपराधों की सूची में शामिल किया गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार, एनसीआरबी के आंकड़ों में बिहार उन राज्यों में शामिल है जहां मानव तस्करी के मामले अधिक दर्ज हुए हैं।
नए कानूनों के अनुरूप किए गए बदलाव
सरकार ने CCA के प्रावधानों में पुराने भारतीय दंड संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम से संबंधित धाराओं की जगह नए आपराधिक कानूनों और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के अनुरूप धाराएं शामिल की हैं। इससे अदालतों में तकनीकी आधार पर आने वाली दिक्कतों को कम करने और कानूनी प्रक्रिया को नए कानूनों के अनुरूप बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार के इस फैसले से अब बिहार में संगठित अपराध, पेपर लीक, मानव तस्करी, भू-माफिया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई और सख्त होने की संभावना है।