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ज्योति बोलीं- पवन सिंह पावर-पोजिशन का फायदा उठा रहे: बार-बार बुलाने पर भी कोर्ट नहीं आते; बोलीं- पर्सनल नंबर तक मेरे पास नहीं

 

भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने कोर्ट में चल रहे मामले को लेकर उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्योति का कहना है कि पवन सिंह अपनी पावर और पोजिशन का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कोर्ट की ओर से बार-बार बुलाए जाने के बावजूद पवन सिंह पेश नहीं हो रहे हैं। ज्योति ने यह भी कहा कि उनके पास पवन सिंह का पर्सनल मोबाइल नंबर तक नहीं है।

ज्योति के मुताबिक, लंबे समय से दोनों के बीच विवाद चल रहा है और मामला अदालत में विचाराधीन है। उनका कहना है कि वह इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रही हैं, लेकिन पवन सिंह की ओर से कोर्ट में नियमित रूप से उपस्थित नहीं होने के कारण सुनवाई प्रभावित हो रही है।

ज्योति ने आरोप लगाया कि पवन सिंह अपने प्रभाव और पहचान का इस्तेमाल कर मामले को टालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब अदालत की ओर से उन्हें बुलाया जाता है तो उन्हें पेश होना चाहिए, लेकिन कई बार बुलाए जाने के बावजूद वह कोर्ट नहीं पहुंचते।

'पवन का पर्सनल नंबर तक नहीं है'

ज्योति सिंह ने अपने और पवन सिंह के रिश्ते को लेकर कहा कि दोनों के बीच संवाद की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास पवन सिंह का व्यक्तिगत मोबाइल नंबर भी नहीं है। ज्योति के मुताबिक, जब किसी मामले में उनसे सीधे संपर्क करने की जरूरत होती है तो यह आसान नहीं होता।

उन्होंने कहा कि कोर्ट में मामला चलने के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत नहीं हो रही है। ज्योति का कहना है कि वह चाहती हैं कि मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़े और दोनों पक्ष अदालत के सामने अपना पक्ष रखें।

कोर्ट में चल रहा है विवाद

पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच वैवाहिक विवाद काफी समय से सुर्खियों में रहा है। दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग आरोप और दावे सामने आते रहे हैं। मामला अदालत में होने के कारण इससे जुड़े कई पहलुओं पर कानूनी प्रक्रिया के तहत सुनवाई चल रही है।

ज्योति ने कहा कि वह लगातार अदालत की प्रक्रिया का पालन कर रही हैं और उनकी कोशिश है कि मामले का उचित समाधान कानूनी तरीके से निकले। वहीं, पवन सिंह की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर प्रतिक्रिया की जानकारी सामने आना बाकी है।

फिलहाल दोनों के बीच विवाद का मामला अदालत में है। ऐसे में अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।