जातीय जनगणना पर केंद्र का बड़ा फैसला, जीतन राम मांझी और गिरिराज सिंह ने कहा- सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम
केंद्र सरकार द्वारा आगामी जनगणना के साथ जातीय जनगणना कराने के फैसले का केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने जोरदार स्वागत किया है। उन्होंने इसे "सामाजिक न्याय का तकाजा" बताते हुए कहा कि यह कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था।मांझी ने कहा:“आजादी के बाद भी जातीय जनगणना कराई जा सकती थी, लेकिन किसी सरकार ने हिम्मत नहीं दिखाई। आज पीएम मोदी ने ये ऐतिहासिक निर्णय लिया है।”
उन्होंने याद दिलाया कि बिहार में पहले ही जातीय जनगणना हो चुकी है और कई राजनीतिक दल लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। मांझी के अनुसार, अब हर क्षेत्र—चाहे खेल हो, शिक्षा या राजनीति—‘जिसकी जितनी संख्या, उसकी उतनी भागीदारी’ का सिद्धांत लागू होगा।
विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए मांझी ने कहा कि वे केवल चिल्लाते रहे, लेकिन कोई ठोस काम नहीं किया। “2014 से पहले भी सरकारें थीं, पर उन्होंने क्यों नहीं कराई जातीय जनगणना?”
गिरिराज सिंह का बयान भी सामने आया: “धन्य हैं पीएम मोदी, जिन्होंने लालू यादव और कांग्रेस के वर्षों पुराने पाप धो दिए।” उन्होंने कांग्रेस और लालू यादव पर मंडल कमीशन को लागू नहीं होने देने का आरोप लगाया और कहा कि मोदी सरकार ने ओबीसी वर्ग को संवैधानिक मजबूती और सवर्ण गरीबों को आरक्षण देकर सबका साथ, सबका विकास का असली उदाहरण पेश किया है। गिरिराज सिंह ने विपक्ष को बहस की खुली चुनौती देते हुए कहा:“कांग्रेस ने सामाजिक समरसता का जीवनभर विरोध किया। अब क्रेडिट लेने का ढोंग कर रही है।”
निष्कर्ष: जातीय जनगणना को लेकर केंद्र सरकार का निर्णय राजनीतिक हलकों में बड़ा मुद्दा बन गया है, जिसे एक तरफ सामाजिक न्याय का ऐतिहासिक कदम कहा जा रहा है तो दूसरी ओर विपक्ष पर पुरानी असफलताओं को लेकर हमले तेज हो गए हैं।