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छत्तीसगढ़ प्लांट हादसे में मारे गए गया के मजदूरों के परिजनों को 20 लाख मुआवजे का आश्वासन, जीतन राम मांझी ने किया गांव का दौरा

 

छत्तीसगढ़ के एक औद्योगिक प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले गया जिले के छह मजदूरों के परिवारों को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही मंत्री ने गया जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत गोटीबांध गांव का दौरा कर शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया।

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि यह हादसा बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता दिलाने की कोशिश की जा रही है। मांझी ने स्पष्ट किया कि मजदूरों की मौत के लिए जिम्मेदार कंपनियों और ठेकेदारों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

गोटीबांध गांव पहुंचे मंत्री मांझी ने मृत मजदूरों के परिजनों से सीधे बातचीत की। इस दौरान परिजनों का दर्द छलक पड़ा। परिवारों ने बताया कि वे अत्यंत गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं और गांव में रोजगार के पर्याप्त साधन न होने के कारण उनके परिजन मजबूरी में छत्तीसगढ़ मजदूरी करने गए थे।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें न तो किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा मिली और न ही सरकारी योजनाओं का सही लाभ। मजदूरों के पास न तो बीमा था और न ही ठेकेदार की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। हादसे के बाद परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

जीतन राम मांझी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीड़ित परिवारों को तुरंत सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि विधवा पेंशन, पारिवारिक लाभ योजना, राशन कार्ड और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ बिना देरी के दिया जाना चाहिए।

मंत्री ने यह भी कहा कि बिहार से बाहर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर सरकार गंभीर है। उन्होंने श्रम विभाग से यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण और बीमा अनिवार्य रूप से कराया जाए।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मंत्री से मांग की कि सिर्फ मुआवजा ही नहीं, बल्कि मृत मजदूरों के परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार दिया जाए, ताकि परिवार आत्मनिर्भर बन सके।

हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की मौत से पूरे इलाके में शोक का माहौल है। गांव में हर घर गमगीन नजर आया। लोगों का कहना है कि अगर गांव में रोजगार के पर्याप्त अवसर होते, तो उन्हें अपने परिजनों को बाहर काम पर भेजने की मजबूरी नहीं होती।

कुल मिलाकर, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का यह दौरा पीड़ित परिवारों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुआवजे की घोषणा कितनी जल्दी जमीनी स्तर पर लागू होती है और सरकार पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।