11 साल पुराने रंगदारी मामले में जेडीयू विधायक अनंत सिंह बरी, MP-MLA कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में किया मुक्त
जेडीयू विधायक और बाहुबली नेता के रूप में चर्चित अनंत सिंह को बड़ी राहत मिली है। पटना की विशेष MP-MLA कोर्ट ने 11 साल पुराने रंगदारी के मामले में साक्ष्य के अभाव में उन्हें बरी कर दिया है। वर्ष 2014 में दर्ज इस केस में अनंत सिंह पर 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का गंभीर आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने ठोस और विश्वसनीय सबूत न मिलने के चलते अनंत सिंह के साथ उनके सहयोगी बंटू सिंह को भी आरोपों से मुक्त कर दिया।
इस मामले की सुनवाई पटना स्थित विशेष MP-MLA कोर्ट में लंबे समय से चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से दावा किया गया था कि अनंत सिंह और उनके सहयोगी ने एक व्यवसायी से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित करने के लिए पुख्ता साक्ष्य पेश करने में असफल रहा। कोर्ट ने गवाहों के बयानों, दस्तावेजों और उपलब्ध सबूतों का गहन परीक्षण करने के बाद यह फैसला सुनाया।
कोर्ट के आदेश में कहा गया कि मामले में प्रस्तुत साक्ष्य आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कई अहम गवाह अपने बयानों से मुकर गए, जबकि कुछ गवाहों के बयान आपसी विरोधाभास से भरे पाए गए। इसके अलावा, अभियोजन पक्ष यह भी स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर सका कि कथित रंगदारी की मांग वास्तव में आरोपियों द्वारा की गई थी। इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने अनंत सिंह और बंटू सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
गौरतलब है कि अनंत सिंह बिहार की राजनीति में एक प्रभावशाली और विवादास्पद चेहरा रहे हैं। वे पहले भी कई आपराधिक मामलों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं और विभिन्न मामलों में जेल भी जा चुके हैं। हालांकि, इस रंगदारी मामले में बरी होने के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर देखी गई। फैसले के बाद अनंत सिंह के करीबियों ने इसे न्याय की जीत बताया।
वहीं, कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला एक बार फिर यह दर्शाता है कि अदालत में किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए ठोस और विश्वसनीय सबूतों का होना कितना जरूरी है। सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती। MP-MLA कोर्ट द्वारा दिया गया यह फैसला कानून की इसी मूल भावना को रेखांकित करता है।
फिलहाल, कोर्ट के इस फैसले के बाद अनंत सिंह को कानूनी तौर पर बड़ी राहत मिली है। हालांकि, उनके खिलाफ अन्य मामलों की स्थिति पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना अहम होगा कि इस फैसले का उनकी राजनीतिक सक्रियता और भविष्य की रणनीति पर क्या असर पड़ता है।