Jamui News: पारंपरिक खेती छोड़ विदेशी आमों से बदली किस्मत, जमुई के किसानों ने मियाजाकी और बनाना मैंगो से कमाए लाखों रुपये
बिहार के जमुई जिले के दो किसानों ने खेती में नया प्रयोग कर सफलता की ऐसी कहानी लिखी है, जो अब दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। कनिष्क और राम प्रसाद गुप्ता ने पारंपरिक खेती का रास्ता छोड़ आधुनिक बागवानी को अपनाया और विदेशी किस्म के आमों की खेती शुरू की। उनकी मेहनत और नवाचार का नतीजा है कि आज उनकी ‘पुष्पवाटिका नर्सरी’ आधुनिक खेती का एक मॉडल बन चुकी है।
दोनों किसानों ने विदेशी आमों की प्रजातियों जैसे मियाजाकी मैंगो और बनाना मैंगो की खेती कर न सिर्फ नई पहचान बनाई, बल्कि इससे सालाना करीब 12 लाख रुपये तक की आय भी हासिल कर रहे हैं।
पारंपरिक खेती से हटकर शुरू किया नया प्रयोग
कनिष्क और राम प्रसाद गुप्ता ने जब खेती में बदलाव का फैसला लिया, तब उनके सामने कई चुनौतियां थीं। पारंपरिक फसलों से अपेक्षित आमदनी नहीं हो पा रही थी। इसके बाद उन्होंने बागवानी की ओर कदम बढ़ाया और विदेशी फलों की खेती का प्रयोग शुरू किया।
शुरुआत में विदेशी आमों की खेती को लेकर कई लोगों ने संदेह जताया, लेकिन दोनों किसानों ने अपनी मेहनत और तकनीकी जानकारी के दम पर इस प्रयोग को सफल बना दिया।
एक पौधे पर उगा रहे कई किस्म के आम
उनकी सबसे खास बात यह है कि पुष्पवाटिका नर्सरी में एक ही पौधे पर आम की कई किस्में उगाई जा रही हैं। यह तकनीक आधुनिक बागवानी का बेहतरीन उदाहरण मानी जा रही है।
एक ही पौधे पर अलग-अलग स्वाद, रंग और आकार वाले आम तैयार करना किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। दूर-दूर से लोग उनकी नर्सरी देखने और खेती की तकनीक समझने पहुंच रहे हैं।
मियाजाकी आम ने दिलाई खास पहचान
मियाजाकी आम दुनिया की सबसे महंगी आम किस्मों में गिना जाता है। इसकी खेती के लिए विशेष देखभाल और बेहतर प्रबंधन की जरूरत होती है।
जमुई जैसे इलाके में इस विदेशी किस्म की सफल खेती कर कनिष्क और राम प्रसाद ने साबित कर दिया कि सही तकनीक और मेहनत के साथ किसान नई संभावनाएं तलाश सकते हैं।
12 लाख रुपये तक पहुंची सालाना कमाई
विदेशी आमों की खेती से दोनों किसानों की आय में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक अपनाने और बेहतर किस्मों की खेती करने से उन्हें सालाना लाखों रुपये की आमदनी हो रही है।
उनकी सफलता यह संदेश देती है कि किसान केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहकर बाजार की मांग के अनुसार नई फसलों और तकनीकों को अपना सकते हैं।
अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा
कनिष्क और राम प्रसाद गुप्ता की सफलता अब इलाके के अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रही है। उनकी नर्सरी में आने वाले किसान विदेशी फल उत्पादन, पौध प्रबंधन और आधुनिक खेती की तकनीक सीख रहे हैं।
उन्होंने साबित किया है कि खेती में जोखिम लेने और नए प्रयोग करने से सफलता हासिल की जा सकती है। उनका यह प्रयास न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि बिहार में आधुनिक कृषि की नई राह भी दिखा रहा है।
जमुई की यह कहानी बताती है कि अगर किसान नई सोच, तकनीक और मेहनत के साथ आगे बढ़ें तो खेती को भी एक लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।