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दारोगा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी का खुलासा, पूर्णिया सेंटर के CCTV फुटेज में दिखी पर्चा आउट होने की घटना; दोनों अभ्यर्थियों का रिजल्ट रद्द करने की अनुशंसा

 

बिहार में दारोगा भर्ती परीक्षा को लेकर पूर्णिया सेंटर से सामने आए मामले ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेंटर के सीसीटीवी फुटेज की जांच में परीक्षा के दौरान कथित अनियमितता का खुलासा हुआ है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुबह 10:05 बजे प्रश्नपत्र बाहर आने और इसके करीब एक घंटे बाद 11:04 बजे वीक्षक की ओर से आंसर-की दिए जाने की बात सामने आई है। इस मामले में संबंधित दोनों अभ्यर्थियों का रिजल्ट रद्द करने की अनुशंसा की गई है।

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सामने आए घटनाक्रम ने भर्ती परीक्षा की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को निर्धारित नियमों के तहत परीक्षा देने और किसी भी तरह की अनुचित गतिविधि से दूर रहने के निर्देश दिए जाते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र या उत्तर उपलब्ध कराने जैसी अनियमितता सामने आती है, तो यह पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए गंभीर मामला बन जाता है।

CCTV फुटेज में सामने आया घटनाक्रम

मामले में पूर्णिया परीक्षा केंद्र के सीसीटीवी फुटेज को अहम साक्ष्य माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फुटेज में सुबह 10:05 बजे प्रश्नपत्र बाहर आने से जुड़ी घटना सामने आई। इसके बाद सुबह 11:04 बजे वीक्षक की ओर से आंसर-की दिए जाने की बात सामने आई है। दोनों घटनाओं के समय के बीच करीब 59 मिनट का अंतर बताया गया है।

परीक्षा केंद्र पर वीक्षक की जिम्मेदारी होती है कि वह परीक्षा के निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करे और अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिलने से रोके। ऐसे में वीक्षक की भूमिका से जुड़ी किसी भी शिकायत की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, पूरे मामले में किस तरह प्रश्नपत्र बाहर आया और आंसर-की किस परिस्थिति में दी गई, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना जरूरी है।

दोनों अभ्यर्थियों का रिजल्ट रद्द करने की अनुशंसा

इस मामले में संबंधित दोनों अभ्यर्थियों का परिणाम रद्द करने की अनुशंसा की गई है। यह कार्रवाई परीक्षा में कथित गड़बड़ी की गंभीरता को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, अनुशंसा और अंतिम निर्णय में अंतर होता है। परिणाम रद्द करने को लेकर संबंधित भर्ती एजेंसी या सक्षम प्राधिकारी का अंतिम आदेश क्या होगा, यह आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

भर्ती परीक्षाओं में किसी भी अभ्यर्थी को अनुचित तरीके से लाभ मिलने की आशंका चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से ऐसे मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों की जांच और नियमों के अनुसार कार्रवाई जरूरी होती है।

भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल

पूर्णिया सेंटर से जुड़ा यह मामला परीक्षा केंद्रों की निगरानी व्यवस्था और परीक्षा संचालन में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चा में है। सीसीटीवी फुटेज जैसी तकनीकी निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य परीक्षा के दौरान होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना और शिकायत मिलने पर तथ्यों की जांच करना है।

अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की जांच रिपोर्ट पर नजर रहेगी। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रश्नपत्र बाहर आने और आंसर-की दिए जाने से जुड़े घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि हो तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल, दोनों अभ्यर्थियों का रिजल्ट रद्द करने की अनुशंसा इस मामले का प्रमुख घटनाक्रम है।