गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने फिर आंदोलन की चेतावनी दी, शहीद दिवस तक अगली रणनीति तय होगी
राजस्थान में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने एक बार फिर आंदोलन की चेतावनी दी है। रविवार, 15 मार्च को हिंडौन सिटी स्थित कर्नल बैंसला निवास पर समिति की अहम बैठक संपन्न हुई। बैठक में समिति के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे और उन्होंने सरकार की निष्क्रियता पर गहरा आक्रोश जताया।
बैठक में यह तय किया गया कि यदि सरकार ने समाज की मांगों पर समय रहते कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो समिति आगामी शहीद दिवस (23 मई) तक अपनी अगली रणनीति पर निर्णय लेगी। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि समाज में लगातार बढ़ता असंतोष और आक्रोश किसी भी समय बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
बैठक में समिति के अध्यक्ष विजय किरोड़ी सिंह बैंसला, परमाल सिंह खटाणा, रामराज भोपर, कप्तान प्रतापसिंह घांटर, रामावतार बडिया, मोहर सिंह माल, कप्तान रेनडायल, भूपेश पांचोली समेत अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने सरकार से गुर्जर समाज की मांगों पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग दोहराई।
समिति ने स्पष्ट किया कि पिछले वर्षों से चल रही आरक्षण की लड़ाई के बावजूद सरकार की निष्क्रियता से गुर्जर समाज में असंतोष बढ़ रहा है। इसके चलते आगामी शहीद दिवस तक समाज की भावनाओं और रणनीति के अनुरूप कोई ठोस कदम उठाने पर विचार किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक और आगामी रणनीति की तैयारी राज्य में राजनीतिक और सामाजिक माहौल को प्रभावित कर सकती है। आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी से सरकार और प्रशासन की सतर्कता बढ़ जाएगी।
समिति के पदाधिकारियों ने मीडिया को बताया कि शहीद दिवस तक आंदोलन की रूपरेखा और समयसीमा तय की जाएगी। इसका उद्देश्य सरकार को याद दिलाना है कि समाज की मांगें अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकतीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गुर्जर समाज की सक्रियता और आंदोलन की चेतावनी से राजनीतिक पार्टियों के बीच भी हलचल बढ़ गई है। सभी दलों और प्रशासनिक अधिकारियों को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा।
समिति ने यह भी कहा कि आंदोलन की योजना केवल सरकार को जवाबदेह बनाने और समाज की मांगों को दबाव के माध्यम से सुनवाई दिलाने के लिए है। उनका जोर इस बात पर है कि सामाजिक और राजनीतिक दबाव के बिना गुर्जर आरक्षण के मुद्दे का समाधान नहीं निकलेगा।
राजस्थान में गुर्जर आरक्षण का संघर्ष पिछले कई वर्षों से जारी है और यह बैठक इसके नए चरण की तैयारी का संकेत देती है। शहीद दिवस तक तय होने वाली रणनीति राज्य के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकती है।
बैठक के समापन पर समिति ने यह संदेश दिया कि गुर्जर समाज अपनी मांगों के प्रति दृढ़ और संगठित है। यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन की चेतावनी को गंभीरता से लेना आवश्यक होगा।