नालंदा की लोकाइन-पंचाने नदी में पहुंचा गंगा का पानी, टाल इलाके में बाढ़ जैसे हालात
जिले में गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब नदियों और टाल क्षेत्र में साफ दिखाई देने लगा है। लोकाइन और पंचाने नदी में गंगा का पानी पहुंच चुका है। सरमेरा प्रखंड के टाल इलाके में गंगा का बैकवाटर तेजी से फैल रहा है, जिससे कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। चेरो पंचायत के पेंदी गांव से लेकर पूर्वी टाल क्षेत्र तक खेतों में करीब 5 फीट तक पानी भर गया है।
खेतों में डूबी फसल, बढ़ी किसानों की चिंता
टाल क्षेत्र में पानी तेजी से फैलने के कारण बड़ी संख्या में खेत जलमग्न हो गए हैं। खेतों में कई फीट पानी जमा होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। फसल के लंबे समय तक पानी में डूबे रहने से नुकसान की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय इलाकों में गंगा के बैकवाटर का फैलाव लगातार बढ़ने से ग्रामीणों की परेशानी भी बढ़ रही है। जिन क्षेत्रों में अभी तक पानी खेतों तक सीमित था, वहां अब जलभराव का दायरा बढ़ता जा रहा है।
लोकाइन-पंचाने में बढ़ा पानी
गंगा का पानी लोकाइन और पंचाने नदी में पहुंचने के बाद इन नदियों के आसपास के इलाकों पर भी इसका असर दिखने लगा है। सरमेरा प्रखंड का टाल क्षेत्र निचला इलाका होने के कारण बैकवाटर के फैलाव से यहां जलभराव तेजी से बढ़ रहा है।
चेरो पंचायत के पेंदी गांव से पूर्वी टाल क्षेत्र तक खेतों में करीब पांच फीट पानी जमा होने की स्थिति बताई जा रही है। इससे इलाके में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
बैकवाटर ने बढ़ाई मुश्किल
टाल क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति सीधे नदी के पानी के उफान के बजाय बैकवाटर के कारण भी गंभीर होती है। गंगा का पानी जब आसपास की नदियों और निचले इलाकों में फैलता है तो खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी जमा होने लगता है।
फिलहाल पानी के लगातार फैलाव से स्थानीय लोगों की निगाहें जलस्तर पर बनी हुई हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि अगर पानी का बढ़ना जारी रहा तो खेतों के साथ-साथ आसपास के रिहायशी इलाकों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
प्रशासन की तैयारी पर भी नजर
गंगा के बैकवाटर के बढ़ते प्रभाव के बीच प्रशासन के सामने टाल क्षेत्र में स्थिति पर नजर बनाए रखने की चुनौती है। जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव की जरूरत पड़ सकती है।
फिलहाल करीब पांच फीट तक पानी में डूबे खेतों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में गंगा और स्थानीय नदियों के जलस्तर में होने वाला बदलाव तय करेगा कि टाल क्षेत्र में हालात कितने गंभीर होते हैं।