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रग्बी से लेकर पारा-स्पोर्ट्स तक देश-दुनिया में बजा बिहार का डंका, ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ से 180 से ज्यादा खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी

 

बिहार में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना अब खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद बनती नजर आ रही है। इस योजना के तहत राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाले 180 से ज्यादा खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। खास बात यह है कि योजना का लाभ केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है। रग्बी से लेकर पारा-स्पोर्ट्स तक विभिन्न खेलों में देश और दुनिया में बिहार का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में अवसर दिया गया है।

राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आर्थिक और रोजगार की सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इससे खिलाड़ियों को खेल जारी रखने के साथ अपना भविष्य सुरक्षित करने का अवसर मिल रहा है। सरकार का मानना है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को यदि रोजगार की चिंता से राहत मिले तो वे अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं।

मेडल जीतने पर सरकारी नौकरी का मौका

‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत खेल प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाले खिलाड़ियों को उनकी योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर सरकारी नौकरी देने का प्रावधान किया गया है। इससे खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा और बेहतर प्रदर्शन की भावना को बढ़ावा मिला है।

योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि खिलाड़ियों को खेल के मैदान में उपलब्धि हासिल करने के बाद रोजगार के लिए अलग से संघर्ष नहीं करना पड़ता। मेडल जीतने के बाद सरकारी सेवा का रास्ता खुलने से युवाओं में खेल को करियर के तौर पर अपनाने का भरोसा बढ़ा है।

रग्बी से पारा-स्पोर्ट्स तक खिलाड़ियों को लाभ

इस योजना के जरिए अलग-अलग खेल विधाओं के खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी का अवसर मिला है। रग्बी जैसे खेलों के खिलाड़ियों के साथ-साथ पारा-स्पोर्ट्स में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी इसका लाभ दिया गया है।

पारा-स्पोर्ट्स के खिलाड़ियों के लिए यह पहल विशेष महत्व रखती है। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को रोजगार मिलने से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। साथ ही दूसरे दिव्यांग खिलाड़ियों को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।

देश-दुनिया में बिहार का नाम रोशन

बिहार के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया है। खेलों में बढ़ती उपलब्धियों के पीछे बेहतर प्रशिक्षण, प्रतिभाओं की पहचान और सरकारी प्रोत्साहन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकारी नौकरी मिलने से खिलाड़ियों को नियमित आय और सामाजिक सुरक्षा मिलती है। इसका सीधा असर उनकी खेल तैयारियों पर भी पड़ सकता है। नौकरी के साथ खिलाड़ी अपनी पसंद के खेल में अभ्यास और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना जारी रख सकते हैं।

युवाओं में बढ़ रहा खेलों के प्रति आकर्षण

पहले कई प्रतिभाशाली युवा खेलों में करियर बनाने से इसलिए पीछे हट जाते थे क्योंकि खेल के बाद रोजगार और भविष्य की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता रहती थी। ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ जैसी योजनाओं से इस सोच में बदलाव आने की उम्मीद है।

अब युवाओं को यह भरोसा मिल रहा है कि खेल के मैदान में अच्छा प्रदर्शन करने पर सम्मान के साथ रोजगार का अवसर भी हासिल किया जा सकता है। इससे स्कूल, कॉलेज और स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को आगे आने के लिए प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

खेल नीति को मिल रही नई दिशा

180 से ज्यादा खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी मिलना बिहार की खेल नीति के लिए अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि खेल प्रतिभाओं को पहचानने, उन्हें प्रशिक्षण देने और उपलब्धि के बाद सम्मानित करने की पूरी व्यवस्था विकसित की जाए।

‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के जरिए खिलाड़ियों को सम्मान और रोजगार दोनों मिलने से खेल को करियर बनाने की दिशा में सकारात्मक माहौल तैयार हुआ है। आने वाले समय में यदि इस तरह के प्रोत्साहन का दायरा और बढ़ता है तो बिहार से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक खिलाड़ी उभर सकते हैं।