बिहार के पूर्व CM भोला पासवान शास्त्री को भारत रत्न देने की मांग, कांग्रेस ने उठाया मुंगेरी लाल आयोग का मुद्दा
बिहार की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ ने शास्त्री को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल भारत रत्न देने की मांग की है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र कुमार पासवान ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह मांग उठाई। इसके साथ ही पटना में उनकी प्रतिमा स्थापित करने और उनके नाम पर संग्रहालय बनाने की मांग भी की गई है।
मुंगेरी लाल आयोग का भी किया गया जिक्र
कांग्रेस की ओर से भोला पासवान शास्त्री को भारत रत्न देने की मांग के पीछे उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल और सामाजिक न्याय से जुड़े कार्यों का हवाला दिया गया। रवींद्र कुमार पासवान के मुताबिक, वर्ष 1971-72 में शास्त्री के मुख्यमंत्री के रूप में अंतिम कार्यकाल के दौरान बिहार में पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन हुआ था, जिसे मुंगेरी लाल आयोग के नाम से जाना जाता है। आयोग ने पिछड़े वर्गों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़े मुद्दों का अध्ययन किया और बाद में अपनी रिपोर्ट में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण समेत कई सिफारिशें कीं। आयोग ने 1977 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उस समय बिहार के मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर थे।
तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे शास्त्री
भोला पासवान शास्त्री बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। कांग्रेस की ओर से यह भी बताया गया कि उन्होंने केंद्र सरकार में मंत्री और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि शास्त्री का सार्वजनिक जीवन सामाजिक न्याय, जनसेवा और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों के लिए समर्पित रहा। पार्टी के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ का कहना है कि उनके योगदान और राजनीतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उनके नाम पर संग्रहालय बनाया जाना चाहिए।
पटना में प्रतिमा और संग्रहालय की मांग
भारत रत्न की मांग के साथ कांग्रेस ने पटना के किसी प्रमुख चौराहे पर भोला पासवान शास्त्री की प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी रखी है। इसके अलावा उनके जीवन, संघर्ष और सार्वजनिक योगदान को प्रदर्शित करने के लिए संग्रहालय बनाने की मांग की गई है।
रवींद्र कुमार पासवान ने कहा कि यदि इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन की ओर से आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शास्त्री के योगदान को सरकारों की ओर से अपेक्षित सम्मान नहीं मिला है। ये कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप और रखी गई मांगें हैं।
पहले भी विधानसभा में उठ चुका है भारत रत्न का मुद्दा
भोला पासवान शास्त्री को भारत रत्न देने की मांग बिहार विधानसभा में भी पहले उठ चुकी है। विधानसभा की वर्ष 2018 की कार्यवाही में इस संबंध में केंद्र सरकार से सिफारिश करने का प्रस्ताव सामने आया था। उस समय राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। अब कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ की ओर से इस मांग को फिर उठाए जाने से भोला पासवान शास्त्री की राजनीतिक विरासत और बिहार में सामाजिक न्याय के इतिहास को लेकर चर्चा तेज हो गई है।