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बिहार में पहली बार हर जिले से चुना गया शिक्षक, 5 सितंबर को 38 शिक्षकों को मिलेगा राजकीय शिक्षक पुरस्कार

 

बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के सम्मान को लेकर एक ऐतिहासिक पहल की है। राजकीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए राज्य के सभी 38 जिलों से एक-एक शिक्षक का चयन किया गया है। बिहार के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है, जब प्रत्येक जिले से अनिवार्य रूप से एक शिक्षक को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया है।

चयनित सभी 38 शिक्षक-शिक्षिकाओं को आगामी 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के अवसर पर पटना के कृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित समारोह में सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा विभाग की इस पहल का उद्देश्य राज्य के सभी जिलों के उत्कृष्ट शिक्षकों को समान अवसर प्रदान करना और उनके योगदान को पहचान देना है।

शिक्षा विभाग के अनुसार, राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन प्रक्रिया में शिक्षकों की शैक्षणिक उपलब्धियों, नवाचार प्रयोगों, विद्यालय विकास में योगदान और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण जैसे मानकों को आधार बनाया गया। इसके बाद सभी जिलों से योग्य शिक्षकों का चयन किया गया है।

इस बार पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों में सरकारी स्कूलों में बेहतर कार्य करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हैं। इन शिक्षकों ने अपने विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, छात्रों की प्रतिभा निखारने और नए तरीकों से पढ़ाई को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

शिक्षक दिवस के मौके पर आयोजित होने वाले समारोह में राज्य सरकार की ओर से सभी चयनित शिक्षकों को सम्मान पत्र और पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस तरह के सम्मान से शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और अन्य शिक्षक भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित होंगे।

गौरतलब है कि हर साल शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। लेकिन इस बार बिहार सरकार ने सभी 38 जिलों से एक-एक शिक्षक का चयन कर पुरस्कार को और व्यापक बनाया है। इससे राज्य के दूरदराज के जिलों में बेहतर काम कर रहे शिक्षकों को भी पहचान मिलने का अवसर मिलेगा।

शिक्षा विभाग की इस पहल को राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 5 सितंबर को होने वाले समारोह में राज्य के चयनित शिक्षक अपने सम्मान के साथ बिहार की शिक्षा व्यवस्था में अपने योगदान की नई पहचान बनाएंगे।