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नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन पर परिवार और JDU में उबाल

 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के फैसले ने राजनीतिक माहौल को फिर से गर्म कर दिया है और उनके अपने घर तथा जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर भी नाराज़गी दिखाई दे रही है। यह कदम विधानसभा चुनावों के बाद राज्य राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को पटना में राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि उनसे मुख्यमंत्री पद पर सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इस कदम के बाद उनके प्रमुख सहयोगी दल JDU के कई कार्यकर्ता और परिवार के सदस्य निराश और चिंतित दिखे हैं।

🟡 घर में भी नाराजगी: रिश्तेदारों ने जताई भावनाएँ

नीतीश कुमार के इस राजनीतिक फैसले पर उनके घर में भी प्रतिक्रिया आई है। बड़ी बहन इंदू ने कहा कि “बिहार उनके बिना खाली लगेगा,” जबकि बहनोई अनिल कुमार ने भावुक रूप से कहा कि राज्य ‘विधवा’ जैसा महसूस होगा अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ देते हैं। परिवार के इन बयान ने स्पष्ट किया है कि उनके राज्य के नेतृत्व से अलग होने की संभावना से निजी और भावनात्मक स्तर पर भी असर पड़ा है।

🔴 JDU कार्यकर्ताओं में असंतोष

पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने के फैसले से बेहद नाराज़ हैं। JDU के कई समर्थकों ने जदयू कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री निवास के पास भी अपना गुस्सा जताया। कुछ कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि यह फैसला “दबाव में लिया गया” और इसके पीछे भाजपा के एजेंटों की साजिश हो सकती है।

कुछ प्रदर्शनकारियों ने तो आत्मदाह की चेतावनी तक दी और जदयू कार्यालय में फर्नीचर तोड़ने तथा प्रर्दशन की घटनाएँ भी हुईं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने 2025 विधानसभा चुनाव में “2025 से 2030 तक फिर से नीतीश” के नारे के साथ वोट मांगे थे, इसलिए इस तरह के बदलाव को कार्यकर्ता स्वीकार नहीं कर सकते।

🔵 नेताओं और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया

पार्टी कार्यकर्ताओं ने राज्यसभा जाने की घोषणा पर कहा कि उन्हें क्लियर जानकारी नहीं दी गई और यह कदम अचानक लिया गया है। कई समर्थक मुख्यमंत्री को डरे और समझौते के बिना इस कदम से पीछे हटने की अपील कर रहे हैं। एक कार्यकर्ता ने कहा, “जो चुनाव हमारे चेहरे पर लड़ा गया, अब वे पद क्यों छोड़ रहे हैं?” — यह सवाल भी उठाया गया है।

विश्लेषकों के अनुसार इस कदम से JDU के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल बढ़ने की संभावना है, क्योंकि पार्टी कार्यकर्ता चाहते हैं कि मुख्यमंत्री पद पर वही बने रहें और राज्य का नेतृत्व जारी रखें।

📌 परिणामी राजनीति:
नीतीश कुमार का राज्यसभा नामांकन बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसमें राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज़ हो रही है। JDU कार्यकर्ताओं और समर्थकों की नाराज़गी इस निर्णय की गहराई को दर्शाती है, जबकि विपक्षी दल भी इस फैसले की आलोचना करते हुए जनता के मत की चिंता व्यक्त कर रहे हैं।