11 साल बाद भी अधूरा सुल्तानगंज-अगुवानी गंगा पुल! तीन बार ढहा हिस्सा, अब सरकार ने तय की नई डेडलाइन
बिहार का बहुचर्चित सुल्तानगंज-अगुवानी गंगा पुल एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब 11 साल पहले शुरू हुई यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है। निर्माण के दौरान पुल का हिस्सा तीन बार गिर चुका है, जिससे परियोजना की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और निर्माण कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अब सरकार ने निर्माण एजेंसी को नवंबर 2027 तक हर हाल में पुल का निर्माण पूरा करने का निर्देश दिया है।
यह पुल बिहार के Sultanganj और अगुवानी क्षेत्र को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है। माना जा रहा था कि पुल बनने के बाद भागलपुर और खगड़िया समेत कई जिलों के लोगों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी। इसके जरिए उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क भी मजबूत होना था। लेकिन लगातार देरी और हादसों ने इस परियोजना को विवादों में ला दिया।
निर्माण कार्य के दौरान अब तक तीन बार पुल का हिस्सा गिर चुका है। हर बार हादसे के बाद जांच के आदेश दिए गए और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे। विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरते हुए इसे भ्रष्टाचार और लापरवाही का उदाहरण बताया। विशेषज्ञों ने कहा कि इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में बार-बार हादसे होना गंभीर तकनीकी खामी की ओर इशारा करता है।
हालांकि सरकार का कहना है कि परियोजना को हर हाल में पूरा कराया जाएगा। संबंधित विभाग की ओर से निर्माण एजेंसी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि नवंबर 2027 तक पुल तैयार होना चाहिए। अधिकारियों के मुताबिक अब निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता जांच को पहले से ज्यादा सख्त किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
स्थानीय लोगों में भी इस पुल को लेकर मिश्रित भावनाएं हैं। एक ओर लोग चाहते हैं कि पुल जल्द से जल्द तैयार हो ताकि उन्हें बेहतर यातायात सुविधा मिल सके, वहीं दूसरी ओर लगातार हो रहे हादसों ने लोगों के मन में डर और अविश्वास भी पैदा कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा नदी पर बनने वाले बड़े पुलों में तकनीकी चुनौतियां काफी अधिक होती हैं। ऐसे प्रोजेक्ट्स में उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री, मजबूत डिजाइन और लगातार निगरानी बेहद जरूरी होती है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बड़े हादसों का कारण बन सकती है।
सुल्तानगंज-अगुवानी पुल बिहार की सबसे चर्चित अधूरी परियोजनाओं में से एक बन चुका है। हर बार नई समयसीमा तय होने के बावजूद काम पूरा नहीं हो पाया। अब सरकार की नई डेडलाइन के बाद लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वास्तव में नवंबर 2027 तक यह पुल तैयार हो पाएगा या फिर देरी और विवादों का सिलसिला जारी रहेगा।