☰
×

बिहार में बारिश का दोहरा संकट: कई इलाकों में सूखे जैसे हालात तो कहीं बाढ़ की मार, 32% कम बारिश से धान की फसल प्रभावित

 

बिहार में इस साल मानसून का असर असमान नजर आ रहा है। राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है, जबकि दूसरी ओर कुछ इलाकों में नदियों के उफान और बाढ़ ने बड़ी आबादी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में मानसून के दौरान सामान्य से करीब 32 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। कई जिलों में बारिश की कमी के कारण धान की फसल प्रभावित हुई है।

10 जिलों में आधी बारिश भी नहीं

बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर राज्य के कई जिलों में देखने को मिला है। बताया जा रहा है कि 10 जिलों में सामान्य बारिश की तुलना में आधी से भी कम वर्षा हुई। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसानों को धान की खेती में परेशानी का सामना करना पड़ा।धान की फसल के लिए मानसून की बारिश बेहद महत्वपूर्ण होती है। बारिश कम होने से कई इलाकों में खेतों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच सका। इससे फसल की वृद्धि प्रभावित हुई और किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।

एक तरफ सूखा, दूसरी तरफ बाढ़

बिहार में मौसम की तस्वीर बेहद अलग-अलग नजर आ रही है। जिन इलाकों में बारिश कम हुई, वहां खेतों में पानी की कमी से किसान परेशान हैं। वहीं दूसरी ओर गंडक, गंगा और अन्य नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।बाढ़ से करीब 50 लाख लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। कई जगह घरों, सड़कों और खेतों में पानी भर गया है। ग्रामीण इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की जरूरत पड़ रही है।

किसानों के सामने दोहरी चुनौती

बारिश की कमी और बाढ़, दोनों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। कम बारिश वाले क्षेत्रों में धान की फसल को पानी नहीं मिल पाया, जबकि बाढ़ प्रभावित इलाकों में खेत पानी में डूब गए। इस तरह एक ही राज्य में किसानों को मौसम की दो विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार कम बारिश के कारण बिहार में मानसून के प्रदर्शन को लेकर चिंता बनी हुई है। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन राहत और बचाव कार्यों पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर की स्थिति राज्य के कृषि क्षेत्र और बाढ़ प्रभावित आबादी के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।