जीपीएस के दौर में ड्राइविंग आसान, लेकिन स्क्रीन निर्भरता बढ़ा रही खतरा
Udaipur में आजकल ड्राइविंग तकनीक के चलते पहले से कहीं अधिक आसान हो गई है। स्मार्टफोन और वाहन में लगे नेविगेशन सिस्टम की मदद से लोग बिना नक्शा देखे सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं। Google Maps जैसे ऐप्स ने रास्ता खोजने की परेशानी को काफी हद तक खत्म कर दिया है, लेकिन इसके साथ ही स्क्रीन पर बढ़ती निर्भरता अब एक नया खतरा भी बनकर सामने आ रही है।
शहर के कई वाहन चालकों का कहना है कि जीपीएस ने यात्रा को सुविधाजनक बना दिया है, लेकिन लगातार स्क्रीन देखने की आदत ड्राइविंग के दौरान ध्यान भटका देती है। खासकर व्यस्त सड़कों और चौराहों पर यह स्थिति और अधिक जोखिम भरी हो जाती है, जहां एक सेकंड की लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि ड्राइविंग के दौरान मोबाइल स्क्रीन या नेविगेशन पर बार-बार नजर डालना ‘डिस्ट्रैक्टेड ड्राइविंग’ की श्रेणी में आता है, जो सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में से एक बन रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार चालक निर्देशों को समझने के चक्कर में आगे की सड़क से ध्यान हटा लेते हैं, जिससे गलत मोड़ लेने या अचानक ब्रेक लगाने जैसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।
स्थानीय ट्रैफिक पुलिस ने भी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए चालकों को सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नेविगेशन का उपयोग करना गलत नहीं है, लेकिन उसे देखते समय वाहन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि ड्राइवर यात्रा शुरू करने से पहले रूट को समझ लें और संभव हो तो मोबाइल को डैशबोर्ड पर फिक्स कर दें, ताकि नजर बार-बार न हटानी पड़े।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि दोपहिया और चारपहिया दोनों वाहनों में बढ़ती तकनीकी सुविधा के बावजूद सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। कई मामलों में यह देखा गया है कि लोग जीपीएस के निर्देशों पर अत्यधिक भरोसा कर लेते हैं और स्थानीय ट्रैफिक संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है।
शहर में बढ़ते ट्रैफिक और संकरी गलियों के कारण पहले से ही चुनौतीपूर्ण स्थिति रहती है, ऐसे में डिजिटल नेविगेशन पर अत्यधिक निर्भरता समस्या को और बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि तकनीक का उपयोग सहायक उपकरण के रूप में किया जाए, न कि पूर्ण नियंत्रण के रूप में।
कुल मिलाकर, जीपीएस और स्मार्ट नेविगेशन ने जहां यात्रा को सरल बनाया है, वहीं इससे जुड़ी लापरवाही सड़क सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनकर उभर रही है। जरूरत इस बात की है कि तकनीक और सावधानी के बीच संतुलन बनाकर सुरक्षित ड्राइविंग को प्राथमिकता दी जाए।