प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक और शिक्षिका का विवाद, बच्चों के सामने अभद्र झगड़ा वायरल
बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा के हरका टोला प्राथमिक विद्यालय में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। वीडियो में शिक्षक धनंजय दुबे और शिक्षिका रजनी तिवारी बच्चों के सामने ही अभद्र भाषा में झगड़ते दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने वीडियो को देखकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। बच्चों के सामने यह विवाद होने से न केवल शिक्षा और अनुशासन पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि उनके सामाजिक और मानसिक विकास पर भी असर पड़ने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, महिला शिक्षक रजनी तिवारी ने अपने सहकर्मी शिक्षक धनंजय दुबे पर कमरा बंद करके गलत हरकत की कोशिश करने का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों के बीच कड़वी बहस और विवाद हुआ, जिसे बच्चों ने अपनी आंखों के सामने देखा। वीडियो में देखा जा सकता है कि आरोपी शिक्षक ने भी महिला शिक्षक को धमकाया और जोर-जबरदस्ती की कोशिश की।
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि यह घटना विद्यालय की साख और बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने शिक्षा विभाग से मांग की है कि दोनों शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि वीडियो की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों से बयान लिए जाएंगे और वीडियो की सत्यता की भी जांच की जाएगी। इसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि दोनों शिक्षकों के खिलाफ क्या अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं बच्चों के लिए नकारात्मक संदेश देती हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षक और शिक्षिका की भूमिका केवल पढ़ाना नहीं है, बल्कि बच्चों में सामाजिक और नैतिक शिक्षा विकसित करना भी है। ऐसे विवाद और झगड़े बच्चों में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर सकते हैं।
स्थानीय प्रशासन ने भी इस घटना के बाद विद्यालय में सख्त निगरानी और सुरक्षा बढ़ा दी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस घटना ने यह स्पष्ट किया कि शिक्षक और शिक्षिका के व्यवहार से बच्चों और समाज पर गहरा असर पड़ता है। अभिभावकों और समाज का कहना है कि शिक्षा संस्थान केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित और सकारात्मक विकास का माध्यम होना चाहिए।
इस प्रकार, बगहा के हरका टोला प्राथमिक विद्यालय में हुए यह विवाद विद्यालय की छवि और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। शिक्षा विभाग और प्रशासन की तत्परता ही सुनिश्चित कर सकती है कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न हों और बच्चों को सुरक्षित और शिक्षाप्रद वातावरण मिल सके।